अमेरिका और ईरान के बीच शांति की सारी कोशिशें नाकाम हो गई हैं। इस्लामाबाद में हुई लंबी बातचीत के बाद भी दोनों देश किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सके। अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Strait of Hormuz की नाकेबंदी करने का फैसला किया है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।

बातचीत क्यों टूटी और अब क्या होगा

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 11 और 12 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच 21 घंटे तक बातचीत चली। लेकिन यह वार्ता विफल रही क्योंकि ईरान परमाणु हथियारों पर अमेरिका की शर्तों को मानने को तैयार नहीं था। इसके तुरंत बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया कि अमेरिकी नौसेना अब Strait of Hormuz में आने-जाने वाले सभी जहाजों की नाकेबंदी करेगी और वहां बिछाई गई माइन्स को नष्ट करेगी।

दोनों देशों की मुख्य मांगें और चेतावनी

इस विवाद में दोनों पक्षों की अपनी शर्तें थीं, जिन्हें दूसरा पक्ष मानने को तैयार नहीं हुआ। यहाँ मुख्य बिंदुओं की जानकारी दी गई है:

पक्ष मुख्य मांग और बयान
अमेरिका ईरान परमाणु हथियार न बनाए और Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही फ्री रहे।
ईरान कतर में जमा अपने 6 अरब डॉलर वापस चाहिए और Strait of Hormuz पर अपना हक चाहता है।
अमेरिकी नौसेना 13 अप्रैल से Strait of Hormuz की पूरी तरह नाकेबंदी की जाएगी।
ईरान IRGC अगर ईरानी पोर्ट्स को खतरा हुआ तो खाड़ी का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।
NATO देश अमेरिका की इस नाकेबंदी में साथ देने से मना कर दिया है।
मध्यस्थ देश पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की 21 अप्रैल तक बातचीत फिर शुरू कराने की कोशिश कर रहे हैं।
सऊदी अरब सऊदी विदेश मंत्री ने इस मुद्दे पर ईरान के विदेश मंत्री से बात की है।

आम लोगों और क्षेत्र पर क्या होगा असर

Strait of Hormuz दुनिया के तेल व्यापार के लिए बहुत जरूरी रास्ता है। अगर यहाँ नाकेबंदी जारी रहती है, तो तेल की कीमतों और सप्लाई पर असर पड़ सकता है। फिलहाल 21 अप्रैल तक के लिए युद्धविराम लागू है। अगर तब तक कोई समझौता नहीं हुआ, तो स्थिति और खराब हो सकती है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com