अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई सीधी बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। 21 घंटे तक चली इस चर्चा के बाद दोनों देश किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा कदम उठाते हुए Strait of Hormuz की नाकेबंदी का ऐलान किया है। इस घटनाक्रम से वैश्विक तेल बाजार और शिपिंग पर बड़ा असर पड़ सकता है।

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बातचीत क्यों रही नाकाम और मुख्य विवाद क्या था?

अमेरिका की मुख्य मांग यह थी कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का पक्का वादा करे और यूरेनियम बनाना बंद करे। इसके अलावा अमेरिका चाहता था कि Strait of Hormuz से जहाजों का रास्ता बिना किसी टोल के खुला रहे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका अपनी मांगें बार-बार बदल रहा था जिसकी वजह से समझौता नहीं हो पाया। वहीं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे JD Vance ने कहा कि ईरान ने परमाणु हथियारों पर स्पष्ट प्रतिबद्धता देने से इनकार कर दिया।

Strait of Hormuz की नाकेबंदी का क्या मतलब है?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि अमेरिकी नौसेना उन जहाजों को रोकेगी जो ईरान को अवैध ट्रांजिट फीस दे रहे हैं। US Central Command (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि यह नाकेबंदी 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे (ET) से शुरू होगी। यह कार्रवाई मुख्य रूप से उन जहाजों के लिए होगी जो ईरानी बंदरगाहों की तरफ जा रहे हैं या वहां से वापस आ रहे हैं। हालांकि CENTCOM ने यह साफ किया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों के लिए नेविगेशन की आजादी बनी रहेगी।

प्रमुख हस्तियों और ईरान की प्रतिक्रिया

JCPOA समझौते में अहम भूमिका निभाने वाली Federica Mogherini ने कहा कि 12 साल की कड़ी मेहनत के बाद यह सोचना गलत था कि 21 घंटे में कोई समझौता हो जाएगा। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने ट्रंप की नाकेबंदी की योजना का मजाक उड़ाया और कहा कि ईरान किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेगा। फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच एक नाजुक ceasefire बना हुआ है लेकिन इस नाकेबंदी के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है।