अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। 21 घंटे तक चली इस लंबी मीटिंग के बाद दोनों देश किसी नतीजे पर नहीं पहुँच पाए। हालांकि अभी के लिए युद्धविराम लागू है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Strait of Hormuz की नाकाबंदी करने का ऐलान कर दिया है जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।

बातचीत क्यों फेल हुई और दोनों देशों का क्या कहना है?

अमेरिका की तरफ से बातचीत का नेतृत्व कर रहे जेडी वेंस ने बताया कि ईरान ने उनकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। अमेरिका की मुख्य मांग यह थी कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का एक पक्का और लिखित वादा करे। वहीं ईरान के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाएई ने कहा कि अमेरिका की मांगें बहुत ज़्यादा और अनुचित थीं। ईरान चाहता था कि उस पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएं, उसकी जमी हुई संपत्ति वापस मिले और इसराइल द्वारा हिजबुल्लाह पर हमलों को रोका जाए।

Strait of Hormuz और युद्धविराम पर अब क्या होगा?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेश दिया है कि अमेरिकी नौसेना तुरंत Strait of Hormuz की नाकाबंदी शुरू करे। वे उन सभी जहाजों को रोकेंगे जिन्होंने ईरान को टैक्स दिया है और समुद्र में बिछी माइन्स को हटाएंगे। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ईशाक डार ने दोनों देशों से अपील की है कि वे अभी लागू युद्धविराम का पालन करें ताकि हालात और न बिगड़ें। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी इस मामले में मध्यस्थता करने की पेशकश की है।

इस पूरे विवाद से जुड़ी मुख्य जानकारियां

विवरण जानकारी
7 अप्रैल 2026 पाकिस्तान की मदद से दो हफ्ते का युद्धविराम शुरू हुआ
11 अप्रैल 2026 इस्लामाबाद में आमने-सामने शांति वार्ता शुरू हुई
12 अप्रैल 2026 21 घंटे की बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हुई
अमेरिकी प्रतिनिधि जेडी वेंस, स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुश्नर
ईरानी प्रतिनिधि मोहम्मद बागेर गालिबफ और अब्बास अराघची
मुख्य विवाद परमाणु हथियार बनाम प्रतिबंध हटाना और संपत्ति की वापसी
ताजा एक्शन अमेरिका द्वारा Strait of Hormuz की नाकाबंदी का ऐलान