अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में चली लंबी बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई। US Vice President JD Vance और ईरान के प्रतिनिधियों ने करीब 21 घंटे तक आमने-सामने चर्चा की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इस विफलता के बाद अब अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नाकाबंदी करने का बड़ा फैसला लिया है।

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बातचीत में क्या हुआ और क्यों नहीं बनी बात?

यह बातचीत 11 और 12 अप्रैल 2026 को हुई थी। JD Vance ने बताया कि अमेरिका ने ईरान के सामने अपनी आखिरी और सबसे अच्छी पेशकश रखी थी। अमेरिका की मुख्य मांग यह थी कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने और उससे जुड़े औजारों का इस्तेमाल न करने का पक्का वादा करे। ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को नागरिक बताया लेकिन अमेरिका की शर्तों को मानने से इनकार कर दिया।

अमेरिका का अगला कदम और नाकाबंदी का असर

बातचीत टूटने के बाद राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया कि अब ईरान के बंदरगाहों पर आने-जाने वाले जहाजों की नाकाबंदी की जाएगी। यह फैसला 13 अप्रैल 2026 से लागू हो गया है। हालांकि अमेरिकी सेना ने साफ किया है कि Strait of Hormuz से गुजरने वाले उन जहाजों को कोई दिक्कत नहीं होगी जो ईरान के बंदरगाहों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।

UN और दुनिया की क्या राय है?

संयुक्त राष्ट्र (UN) के Secretary-General António Guterres ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने 13 अप्रैल को अपील की कि अमेरिका और ईरान को फिर से बातचीत शुरू करनी चाहिए क्योंकि इस लड़ाई का कोई सैन्य समाधान नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि शांति बनाए रखना और युद्धविराम को जारी रखना दुनिया के लिए बहुत जरूरी है।