पाकिस्तान के इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है. इस मुश्किल घड़ी में ओमान ने दोनों देशों को चेतावनी दी है कि अगर युद्ध रोकना है तो उन्हें कुछ कड़वे और दर्दनाक फैसले लेने होंगे. ओमान का कहना है कि युद्ध की तबाही झेलने से बेहतर है कि आपसी सहमति बनाई जाए.

बातचीत नाकाम होने की बड़ी वजह क्या रही?

अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं था, इसलिए कोई डील नहीं हो पाई. वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने कहा कि अमेरिका की मांगें गलत थीं. ईरान के मुताबिक दो-तीन बड़े मुद्दों और Strait of Hormuz को लेकर दोनों देशों की राय अलग थी.

ओमान ने दोनों देशों को क्या सलाह दी?

ओमान के विदेश मंत्री Badr Al-Busaidi ने सोशल मीडिया पर कहा कि बातचीत को सफल बनाने के लिए दोनों पक्षों को कुछ कड़े कदम उठाने होंगे. उन्होंने 7 अप्रैल को लागू हुए सीजफायर को आगे बढ़ाने की मांग की. उनके अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस युद्ध टालना चाहते थे.

दुनिया के अन्य देशों का क्या रुख है?

  • ब्रिटेन: प्रधानमंत्री Keir Starmer और ओमान के सुल्तान Haitham bin Tariq ने सीजफायर बढ़ाने पर सहमति जताई.
  • ऑस्ट्रेलिया: विदेश मंत्री Penny Wong ने बातचीत फिर से शुरू करने की अपील की.
  • यूरोपीय संघ: EU प्रवक्ता ने कहा कि मध्य पूर्व के विवाद को सुलझाने के लिए कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है.
Nura Basta

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