अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय बाद इस्लामाबाद में सीधी बातचीत शुरू हुई है. पाकिस्तान की मदद से दोनों देशों के बड़े नेताओं और अधिकारियों ने मुलाकात की है. ईरान के प्रतिनिधि ने कहा कि इस बातचीत का मुख्य मकसद अपने देश के खिलाफ चल रही अवैध जंग को खत्म करना है.

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ईरान ने अमेरिका के सामने क्या शर्तें रखी हैं?

ईरान ने बातचीत के लिए एक 10 अंकों का प्लान पेश किया है. उनकी मुख्य मांगें नीचे दी गई तालिका में हैं:

मुख्य मांग विवरण
लेबनान युद्धविराम लेबनान में इजरायली हमलों को रोकना
संपत्तियां फ्रीज किए गए ईरानी पैसों को वापस करना
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज रास्ते के नियंत्रण और शुल्क पर अधिकार
परमाणु अधिकार यूरेनियम समृद्ध करने का अधिकार
मुआवजा युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई
सुरक्षा गारंटी अमेरिका दोबारा हमला न करने की गारंटी दे

अमेरिका का इस पर क्या कहना है?

अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, बशर्ते ईरान नेक नीयत से बात करे. हालांकि, अमेरिका ने लेबनान में युद्धविराम की बात को गलतफहमी बताया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं मिलेगी और यूरेनियम संवर्धन बिल्कुल नहीं होने दिया जाएगा.

पाकिस्तान की इस मीटिंग में क्या भूमिका है?

पाकिस्तान इस पूरी बातचीत में एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और मेजबानी कर रहा है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी और ईरानी दोनों प्रतिनिधिमंडलों से अलग-अलग मुलाकात की है. पाकिस्तानी अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि इस कोशिश से दुनिया में शांति आएगी और दोनों देशों के बीच तनाव कम होगा.