अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में चली बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने साफ कर दिया है कि अमेरिका ने अपना आखिरी और सबसे अच्छा प्रस्ताव ईरान के सामने रख दिया था। करीब 21 घंटे तक चली इस लंबी और गहन बातचीत के बाद भी दोनों देशों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई और अमेरिकी टीम वहां से वापस लौट आई है।
बातचीत क्यों रही नाकाम और मुख्य विवाद क्या था?
इस पूरी बातचीत का सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम था। अमेरिका चाहता था कि ईरान इस बात की पक्की गारंटी दे कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने कहा कि यह राष्ट्रपति Donald Trump का मुख्य लक्ष्य है। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने पलटवार करते हुए कहा कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा और गैरकानूनी थीं, जिस वजह से यह समझौता नहीं हो सका।
अब आगे क्या होगा और मौजूदा स्थिति क्या है?
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल अब इस्लामाबाद से रवाना हो गया है। राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सैन्य ताकत इलाके में तैनात रहेगी। वहीं, पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने दोनों देशों से अपील की है कि वे युद्धविराम के समझौते को बनाए रखें ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।
| तारीख | क्या हुआ |
|---|---|
| 8 अप्रैल 2026 | अमेरिका ने बातचीत के लिए पाकिस्तान अपनी टीम भेजी |
| 9 अप्रैल 2026 | व्हाइट हाउस ने J.D. Vance के नेतृत्व की पुष्टि की |
| 11 अप्रैल 2026 | इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान की बातचीत शुरू हुई |
| 12 अप्रैल 2026 | 21 घंटे बाद बातचीत बिना किसी डील के खत्म हुई |
