अमेरिका और ईरान के बीच पिछले छह हफ्ते से चल रहे टकराव को खत्म करने के लिए इस्लामाबाद में सीधी बातचीत शुरू हुई है। इस अहम बैठक में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इससे पहले 7 अप्रैल को दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम तय हुआ था। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या ये बैठक स्थायी शांति ला पाएगी।

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ईरान ने बातचीत के लिए क्या शर्तें रखी हैं?

ईरान ने बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए अपनी कुछ मुख्य मांगें रखी हैं। ईरान चाहता है कि युद्ध पूरी तरह खत्म हो और भविष्य में उस पर कोई हमला न हो। साथ ही, ईरान ने अपने फ्रीज किए गए 6 अरब डॉलर की वापसी और अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर आश्वासन मांगा है। इसके अलावा, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने के अधिकार की भी मांग की है।

बैठक में शामिल मुख्य लोग और उनके बयान

इस बातचीत में दोनों देशों के बड़े नेता शामिल हैं। पाकिस्तान की पूर्व राजनयिक Maleeha Lodhi ने कहा कि इस बातचीत से बहुत ज्यादा उम्मीदें नहीं रखनी चाहिए क्योंकि कूटनीति एक प्रक्रिया है जिसमें समय लगता है। वहीं अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने बातचीत पर भरोसा जताया लेकिन ईरान को आगाह भी किया।

व्यक्ति भूमिका मुख्य बात
Maleeha Lodhi पूर्व राजनयिक कूटनीति एक प्रक्रिया है, इसमें समय लगेगा
JD Vance अमेरिकी उपराष्ट्रपति बातचीत पर भरोसा लेकिन ईरान को चेतावनी दी
Donald Trump अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान की परमाणु क्षमता रोकना मुख्य लक्ष्य है
Abbas Araghchi ईरान के विदेश मंत्री पुराना भरोसा टूट चुका है, हमले हुए तो जवाब देंगे
Shehbaz Sharif पाकिस्तान के पीएम शांति प्रयासों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं

बातचीत में क्या मुश्किलें आ रही हैं?

शांति की कोशिशों के बीच कुछ बड़े मुद्दे अभी भी रुकावट बने हुए हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल क्षमता को लेकर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद हैं। इसके अलावा, लेबनान में इजराइल के जारी सैन्य हमलों ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया है। ईरान इन हमलों को युद्धविराम का उल्लंघन मानता है और इसे बातचीत की सफलता के लिए एक बड़ी बाधा बता रहा है।