अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई सीधी बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच करीब 20 घंटे से ज्यादा समय तक चर्चा चली, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। यह मुलाकात एक दो हफ्ते के युद्धविराम के दौरान हुई थी और दस साल बाद दोनों देश पहली बार आमने-सामने बैठे थे।

बातचीत क्यों नाकाम रही और दोनों देशों ने क्या कहा?

ईरान के मुख्य negotiator और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालिबाफ ने इस विफलता के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ईरानी टीम का भरोसा जीतने में नाकाम रहा और ईरान को पुराने अनुभवों की वजह से अमेरिका पर भरोसा नहीं है। दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि ईरान अमेरिकी शर्तों को मानने को तैयार नहीं था। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना था कि ईरान परमाणु हथियार न बनाए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस पर कहा कि उनके लिए डील होना बहुत ज़रूरी नहीं था क्योंकि अमेरिका पहले ही जीत चुका है।

किन मुख्य मुद्दों पर नहीं बनी सहमति?

दोनों देशों के बीच कई गंभीर मुद्दों पर बहस हुई, लेकिन किसी भी बात पर सहमति नहीं बन पाई। मुख्य विवादित मुद्दे नीचे दी गई टेबल में दिए गए हैं:

विवादित मुद्दा विवरण
परमाणु कार्यक्रम अमेरिका चाहता था कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने की पक्की गारंटी दे।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य रास्ते के कंट्रोल और ट्रांजिट फीस को लेकर दोनों देशों में मतभेद थे।
जमी हुई संपत्ति ईरान अपनी फ्रीज्ड एसेट्स को वापस पाने की मांग कर रहा था।
लेबनान युद्ध ईरान ने शर्त रखी कि इसराइल द्वारा हिजबुल्लाह पर हमले बंद होने चाहिए।
युद्ध हर्जाना युद्ध के कारण हुए नुकसान की भरपाई यानी वार रिपेरेशन पर चर्चा हुई।

पाकिस्तान की भूमिका और ताज़ा हालात क्या हैं?

इस पूरी बातचीत की मेजबानी पाकिस्तान के इस्लामाबाद शहर ने की थी, जहाँ पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशक डार और आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने दोनों प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया। सुरक्षा के लिहाज से पूरे इस्लामाबाद में भारी लॉकडाउन लगाया गया था। इसी बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी कि अमेरिकी नेवी के जहाजों ने शनिवार को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों को हटाने का काम शुरू कर दिया है।