अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हाई-लेवल बैठक चल रही है। शनिवार से शुरू हुई यह बातचीत अब दूसरे दिन यानी रविवार तक बढ़ गई है। दोनों देशों के बीच बातचीत तो हो रही है, लेकिन कुछ मुद्दों पर अभी भी गहरी असहमति बनी हुई है।

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ईरान और अमेरिका की शर्तों में क्या अंतर है?

ईरान ने अपनी कुछ शर्तें तय की हैं। वह चाहता है कि लेबनान में इसराइली हमले रुकें, हमलों से हुए नुकसान का मुआवजा मिले और उसके फ्रीज किए गए पैसे वापस मिलें। ईरान ने 10 पॉइंट का प्रस्ताव रखा है जिसमें युद्ध खत्म करने और Strait of Hormuz पर अपना नियंत्रण रखने की बात कही गई है।

दूसरी तरफ अमेरिका ने 15 पॉइंट का प्रस्ताव रखा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान के परमाणु प्रोग्राम पर पाबंदी लगे और Strait of Hormuz को फिर से सबके लिए खोला जाए। उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा है कि अमेरिका बात करने को तैयार है, लेकिन ईरान को ईमानदारी दिखानी होगी।

Strait of Hormuz पर क्यों मचा है बवाल?

इस समुद्री रास्ते को लेकर दोनों देशों में गंभीर विवाद है। अमेरिकी नेवी ने शनिवार को बताया कि उन्होंने वहां माइंस हटाने की तैयारी शुरू कर दी है और उनके दो जहाज वहां से गुजरे हैं। हालांकि ईरान ने इस बात को गलत बताया है।

ईरान की Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने चेतावनी दी है कि किसी भी सैन्य जहाज के वहां आने पर कड़ा जवाब दिया जाएगा। ईरान ने साफ किया है कि वह केवल नियम मानने वाले गैर-सैन्य जहाजों को ही रास्ता देगा और ट्रांजिट फीस लेना जारी रखेगा।

बातचीत में कौन-कौन शामिल है?

इस बैठक में कई देशों के बड़े अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं, जिसकी जानकारी नीचे टेबल में दी गई है:

देश/संस्था मुख्य प्रतिनिधि/भूमिका
अमेरिका JD Vance, Steve Witkoff, Jared Kushner
ईरान Mohammad Bagher Ghalibaf, Abbas Araghchi
पाकिस्तान PM Shehbaz Sharif (मेजबान और मध्यस्थ)
अन्य देश चीन, मिस्र, सऊदी अरब और कतर (समर्थन के लिए)

कतर ने रविवार से सभी समुद्री गतिविधियों को फिर से शुरू करने का ऐलान किया है। फिलहाल दोनों देशों की एक्सपर्ट टीमें कागजों और ड्राफ्ट पर काम कर रही हैं ताकि कोई रास्ता निकाला जा सके।