अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब बातचीत के मोड़ पर पहुंच गया है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच सीधी मुलाकात हो रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान को पूरी तरह हरा दिया है और अब एक निर्णायक शांति समझौते पर काम चल रहा है।

इस्लामाबाद में क्या चल रही है बातचीत और कौन शामिल हैं?

यह हाई-लेवल बातचीत शनिवार 11 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में शुरू हुई, जो रविवार 12 अप्रैल की सुबह तक चली। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच छह हफ्ते से चल रहे युद्ध को खत्म करना है। इस बातचीत में दोनों देशों के बड़े अधिकारी शामिल हुए हैं।

  • अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल: उपराष्ट्रपति JD Vance, स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर।
  • ईरानी प्रतिनिधिमंडल: संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची।
  • मध्यस्थ: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और विदेश मंत्री मोहम्मद इसहाक डार।

समझौते में क्या दिक्कतें आ रही हैं और शर्तें क्या हैं?

व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि यह आमने-सामने की बातचीत है, लेकिन अभी भी कई बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है। ईरान ने अपनी शर्तों पर जोर दिया है, जबकि अमेरिका अपनी सैन्य जीत के दावों पर अड़ा है।

पक्ष प्रमुख मांगें और दावे
अमेरिका ईरान की सैन्य शक्ति को नष्ट करने का दावा, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में मुफ्त रास्ता और परमाणु कार्यक्रम पर रोक।
ईरान जमी हुई संपत्तियों की वापसी, प्रतिबंधों को हटाना, लेबनान में युद्धविराम और अमेरिकी सेना की वापसी।
पाकिस्तान युद्धविराम करवाने और दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने में मदद करना।

दुनिया भर में इस बैठक और बयानों पर क्या प्रतिक्रिया है?

राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि अमेरिका ने अपने सभी सैन्य उद्देश्यों को पूरा कर लिया है। दूसरी तरफ, पोप लियो XIV ने इस युद्ध की आलोचना की है और राजनीतिक नेताओं से शांति के लिए अपील की है। ईरान के विदेशी दूतावासों ने ट्रंप के आक्रामक बयानों को गलत बताया है और कहा है कि नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करना युद्ध अपराध के समान है।