अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक बहुत बड़ी बैठक हुई है. शनिवार 11 अप्रैल 2026 को बातचीत का पहला दौर पूरा हो गया. अब दोनों देशों की टीमें लिखित दस्तावेजों का आदान-प्रदान कर रही हैं ताकि तय की गई बातों को पक्का किया जा सके. पाकिस्तान इस पूरी बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.

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ईरान ने अपनी किन मांगों पर जोर दिया है?

ईरान ने बातचीत के लिए 10 पॉइंट का एक प्रस्ताव रखा है. इस प्रस्ताव में लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायली हमलों को रोकने की मांग की गई है. ईरान चाहता है कि उसके फ्रीज किए गए 6 अरब डॉलर वापस मिले और उसके परमाणु कार्यक्रम को सुरक्षा की गारंटी दी जाए. इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने और युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई की मांग भी की गई है.

अमेरिका का स्टैंड और मौजूदा हालात क्या हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य मकसद ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है. ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को बातचीत के लिए एक आधार माना है लेकिन साथ ही सख्त चेतावनी भी दी है. इसी बीच US CENTCOM ने होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने का काम शुरू कर दिया है. हालांकि इजराइल ने लेबनान में युद्धविराम मानने से इनकार किया है और वहां हमले जारी रखे हैं.

बातचीत में कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं?

इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग में दोनों देशों के शीर्ष अधिकारी और नेता शामिल हुए हैं. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ इस पूरी प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद कर रहे हैं.

पक्ष मुख्य सदस्य/नेता
अमेरिका JD Vance, Steve Witkoff, Jared Kushner
ईरान Mohammad Bagher Ghalibaf, Abbas Araghchi, Ali Bagheri Kani
मध्यस्थ (पाकिस्तान) Shehbaz Sharif, Asim Munir