अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता अब खतरे में है। पाकिस्तान के न्यूज़ आउटलेट ARY News के मुताबिक, ईरान अभी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने को तैयार नहीं है, जिससे बातचीत की उम्मीदें तेजी से कम हो गई हैं। दोनों देशों के बीच पश्चिम एशिया में शांति लाने की कोशिशें की जा रही थीं, लेकिन फिलहाल मामला फंसा हुआ है।

ईरान ने बातचीत के लिए क्या शर्तें रखी हैं?

ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता, तब तक वह बातचीत नहीं करेगा। ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi इस्लामाबाद तो पहुंचे, लेकिन उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ सीधी मुलाकात से इनकार कर दिया। अब पाकिस्तान के जरिए ही ईरान के प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाए जा सकते हैं।

अब तक क्या हुआ और अमेरिका का क्या रुख है?

इस मामले में अब तक कई उतार-चढ़ाव आए हैं। 8 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने दो हफ्ते का युद्धविराम घोषित किया था। राष्ट्रपति Donald Trump ने बाद में इस युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया ताकि ईरान अपनी योजना बना सके। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि Steve Witkoff और Jared Kushner इस्लामाबाद जा रहे हैं, लेकिन ट्रंप ने कहा कि वह कोई समझौता करने की जल्दबाजी में नहीं हैं और इसके लिए ईरान के आंतरिक मतभेदों को जिम्मेदार बताया।

ईरान पर अमेरिका ने और क्या दबाव बनाया है?

बातचीत की कोशिशों के बीच अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया है। अमेरिका ने एक बड़ी चीनी तेल रिफाइनरी और करीब 40 शिपिंग कंपनियों और टैंकरों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। ये कंपनियां ईरानी कच्चे तेल के परिवहन से जुड़ी हुई हैं। इस कदम से ईरान की तेल निर्यात करने की क्षमता पर असर पड़ेगा।