अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति बातचीत को लेकर इसराइल काफी नाराज नजर आ रहा है। 25 मई 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस समय चौतरफा दबाव में घिरे हुए हैं। उन्हें एक तरफ ईरान और लेबनान के मोर्चे पर सुरक्षा की चिंता सता रही है, तो दूसरी तरफ देश के भीतर समय से पहले चुनाव कराने का भारी राजनीतिक दबाव झेलना पड़ रहा है। अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने इस महत्वपूर्ण बातचीत से इसराइल को काफी हद तक अलग रखा है।

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अमेरिका और ईरान की बातचीत से क्यों परेशान है इसराइल?

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति तो हो रही है, लेकिन दोनों देशों ने साफ किया है कि कोई भी अंतिम समझौता अभी तुरंत होने की उम्मीद नहीं है। इस बातचीत से सबसे ज्यादा परेशानी इसराइल को है, क्योंकि उसे इस पूरी प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। इसराइली रक्षा अधिकारियों को बातचीत से जुड़े अपडेट के लिए अन्य क्षेत्रीय देशों के राजनयिक संपर्कों और खुफिया तंत्रों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इसराइल को आशंका है कि इस समझौते में उसकी मुख्य चिंताओं, जैसे ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और लेबनान में सक्रिय हिजबुल्लाह के खतरे पर ध्यान नहीं दिया जाएगा।

बेंजामिन नेतन्याहू पर बढ़ा घरेलू और बाहरी दबाव

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस समय कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इसराइल के भीतर उनके गठबंधन में शामिल अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स राजनीतिक दल उन पर दबाव बना रहे हैं, जिसके कारण देश में जल्द चुनाव होने की चर्चा तेज हो गई है। नेतन्याहू ने निजी तौर पर यह माना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसलों पर उनका प्रभाव बहुत सीमित है। इसके अलावा, लेबनान सीमा पर हिजबुल्लाह के साथ जारी तनाव ने उनकी सरकार के सामने बड़ी सुरक्षा चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अपनी घरेलू स्थिति को मजबूत करने के लिए वे किसी बाहरी मोर्चे पर तनाव बढ़ा सकते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन का क्या है रुख?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ बातचीत जारी है और उन्होंने अपनी टीम को किसी जल्दबाजी में समझौता न करने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि एक शांति समझौते पर बातचीत काफी हद तक हो चुकी है, लेकिन अभी अंतिम विवरण पर चर्चा बाकी है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि कोई भी समझौता अमेरिकी मानकों के आधार पर ही होगा और अमेरिका इसराइल की आत्मरक्षा के अधिकार का पूरा समर्थन करता है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने भी कहा कि कई मुद्दों पर आपसी समझ बनी है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर आगे की बात तभी होगी जब ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता तय हो गया है?

नहीं, अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच बातचीत में प्रगति जरूर हुई है और कई मुद्दों पर समझ बनी है, लेकिन अभी कोई अंतिम समझौता तुरंत होने की संभावना नहीं है।

इसराइल इस बातचीत को लेकर नाराज क्यों है?

इसराइल को इस वार्ता से काफी हद तक बाहर रखा गया है और उसे डर है कि होने वाले समझौते में उसकी सुरक्षा चिंताओं, जैसे हिजबुल्लाह के खतरे और ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को नजरअंदाज किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर क्या दबाव है?

नेतन्याहू अपनी गिरती लोकप्रियता, सहयोगियों के दबाव और लेबनान सीमा पर जारी तनाव के कारण देश के भीतर समय से पहले चुनाव कराने के भारी दबाव का सामना कर रहे हैं।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.