अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक बार फिर कोशिशें शुरू हो गई हैं। अमेरिकी दूत Steve Witkoff और Jared Kushner पाकिस्तान के इस्लामाबाद जा रहे हैं जहाँ उनकी मुलाकात ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi से होगी। हालांकि इस बार अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance इस टीम का हिस्सा नहीं हैं और वे स्टैंडबाय पर रहेंगे।

अमेरिका और ईरान की बातचीत में अब क्या बदलाव हुए हैं?

इससे पहले 11 अप्रैल को जेडी वेंस ने अमेरिकी टीम की अगुवाई की थी, लेकिन तब 21 घंटे चली बातचीत के बाद भी कोई समझौता नहीं हो पाया था। अब 24-25 अप्रैल को होने वाली चर्चाओं में विटकॉफ और कुश्नर जा रहे हैं। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि पिछली बातचीत विफल रहने के कारण इस बार चर्चा का स्तर थोड़ा कम रखा गया है, इसलिए उपराष्ट्रपति वेंस इस दौर में शामिल नहीं हो रहे हैं।

ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को बेकार क्यों बताया?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम (ceasefire) को अनिश्चित काल तक बढ़ाने का ऐलान किया था, लेकिन ईरान ने इसे अर्थहीन कहा है। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने उनके बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी कर रखी है, जो कि युद्धविराम का उल्लंघन है। ईरान की सरकार ने साफ़ कर दिया है कि जब तक यह नाकेबंदी नहीं हटती, उनके प्रतिनिधि सीधे बातचीत की मेज पर नहीं लौटेंगे।

बातचीत का नया तरीका और पाकिस्तान की क्या भूमिका है?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाक़ई ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधिमंडलों के बीच कोई सीधी मुलाकात नहीं होगी। इसके बजाय, पाकिस्तान के अधिकारी दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुँचाने का काम करेंगे। अमेरिका ने भी यह जानकारी दी है कि वे पाकिस्तानी मध्यस्थों के ज़रिए ईरान का शांति प्रस्ताव सुनने के लिए तैयार हैं।

Sushma Kumari

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