अमेरिका और ईरान के बीच 1979 के बाद पहली बार सीधी बातचीत हुई, लेकिन यह कोशिश नाकाम रही। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली इस मीटिंग में कोई समझौता नहीं हो पाया। अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Strait of Hormuz की नाकेबंदी का आदेश दिया है, जिससे दुनिया भर में तनाव बढ़ गया है।

बातचीत क्यों नाकाम हुई और अमेरिका की क्या शर्तें थीं?

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे Vice President JD Vance ने बताया कि ईरान ने अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। अमेरिका की मुख्य मांग यह थी कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने का पक्का वादा करे और ऐसे किसी भी साधन का इस्तेमाल न करे जिससे परमाणु हथियार बनाए जा सकें। दूसरी ओर, ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा कि अमेरिका उनका भरोसा जीतने में नाकाम रहा और उसकी मांगें बहुत ज़्यादा थीं।

Strait of Hormuz पर नाकेबंदी और ईरान की चेतावनी

बातचीत टूटने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी नेवी को तुरंत Strait of Hormuz की नाकेबंदी करने का आदेश दिया है। ट्रंप ने कहा कि जो कोई भी ईरान को रास्ता देने के लिए टोल देगा, उसे समुद्र में सुरक्षित रास्ता नहीं मिलेगा। जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि किसी भी सैन्य जहाज़ के आने पर सख्त और जोरदार जवाब दिया जाएगा। ईरान के नेवी चीफ Shahram Irani ने ट्रंप की इस धमकी को बेकार बताया है।

पाकिस्तान की भूमिका और आगे का खतरा

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और आर्मी चीफ Field Marshal Asim Munir ने इस ऐतिहासिक मीटिंग की मेजबानी की। यह बातचीत 11 और 12 अप्रैल 2026 को हुई थी। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों से सीजफायर का सम्मान करने की अपील की है। अब दुनिया की नज़र 22 अप्रैल पर है, क्योंकि उस दिन दोनों देशों के बीच चल रहा सीजफायर खत्म हो जाएगा, जिससे युद्ध का खतरा फिर से बढ़ सकता है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.