अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक बार फिर बातचीत की कोशिश हो रही है. इस बार दोनों देशों के प्रतिनिधि पाकिस्तान के इस्लामाबाद में जुट रहे हैं. राष्ट्रपति Donald Trump ने अपनी एक स्पेशल टीम को बातचीत के लिए भेजा है, हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी अधिकारियों से सीधे तौर पर नहीं मिलेगा.
US की टीम में कौन हैं और JD Vance क्यों नहीं जा रहे?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने इस दौर की बातचीत के लिए अपने स्पेशल एनवॉय Steve Witkoff और दामाद Jared Kushner को इस्लामाबाद भेजा है. यह टीम 25 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के लिए रवाना हुई. इससे पहले Vice President JD Vance ने एक अमेरिकी टीम का नेतृत्व किया था, लेकिन 21 घंटे चली उस बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला. इसी वजह से इस बार कम स्तर की टीम भेजी गई है. JD Vance फिलहाल अमेरिका में ही रहेंगे, लेकिन जरूरत पड़ने पर वह पाकिस्तान जा सकते हैं.
ईरान का क्या रुख है और पाकिस्तान की क्या भूमिका है?
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi 24 अप्रैल की रात को इस्लामाबाद पहुंच गए. लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने 25 अप्रैल को बताया कि इस दौरे के दौरान अमेरिका के साथ कोई सीधी मुलाकात नहीं होगी. पाकिस्तान के अधिकारी दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच संदेश पहुंचाने का काम करेंगे. ईरान का कहना है कि अमेरिका ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकाबंदी कर रखी है, जिसे वह युद्ध जैसा कदम मानता है. ईरान के मुताबिक, जब तक यह नाकाबंदी खत्म नहीं होती, तब तक पूरी तरह शांति नहीं हो सकती.
सीजफायर और दोनों देशों की मुख्य शर्तें क्या हैं?
राष्ट्रपति Trump ने 22 अप्रैल को सीजफायर (युद्धविराम) की समय सीमा को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया. उन्होंने ऐसा पाकिस्तान के अनुरोध पर किया ताकि ईरान अपनी एक साझा योजना तैयार कर सके. अमेरिका की मुख्य शर्त यह है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करे और परमाणु हथियार न बनाने का वादा करे. इस पूरे मामले में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और विदेश मंत्री Ishaq Dar मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और इस्लामाबाद में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.