अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली एक बहुत बड़ी मीटिंग टल गई है। स्विट्जरलैंड के Burgenstock रिसॉर्ट में 19 जून 2026 को दोनों देशों के बीच बातचीत होनी थी, लेकिन अब इसे स्थगित कर दिया गया है। ईरान ने साफ कह दिया है कि वह तब तक बातचीत नहीं करेगा जब तक लेबनान में युद्ध नहीं रुकता और उस पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाए जाते।

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दरअसल, दक्षिणी लेबनान में इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई तेज हो गई है, जिसकी वजह से यह मीटिंग टली। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने कहा कि अमेरिका की यह जिम्मेदारी है कि वह इस समझौते को पूरा कराए। ईरान के सुरक्षा अधिकारी Mohammad Bagher Zolghadr ने चेतावनी दी कि लेबनान उनके लिए बहुत जरूरी है और उनकी लक्ष्मण रेखा पार करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

हालांकि, स्विट्जरलैंड ने 20 जून को बताया कि वह अभी भी बातचीत के लिए जगह उपलब्ध करा रहा है। इस मामले में पाकिस्तान भी बीच-बचाव कर रहा है ताकि बातचीत दोबारा शुरू हो सके। इसी बीच ईरान ने देश के उत्तर-पश्चिम हिस्से से 480 लोगों को गिरफ्तार किया है। ईरान का आरोप है कि इन लोगों के संबंध इसराइल और अमेरिका से थे।

दोनों देशों के बीच एक समझौता (MOU) हुआ था, जिसकी मुख्य शर्तें नीचे टेबल में दी गई हैं:

शर्त/नियम विवरण
युद्ध विराम लेबनान समेत सभी मोर्चों पर लड़ाई तुरंत और हमेशा के लिए बंद होगी।
प्रतिबंधों में राहत ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाए जाएंगे, जो परमाणु कार्यक्रम के अंतिम समझौते पर निर्भर है।
परमाणु कार्यक्रम ईरान ने यूरेनियम को डाउन-ब्लेंड करने और परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है।
समुद्री नाकाबंदी अमेरिका ने ईरान की समुद्री नाकाबंदी हटा ली है और Strait of Hormuz को फिर से खोला जा रहा है।
बातचीत का समय पूरे समझौते के लिए 60 दिन का समय तय किया गया है, जिसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
पुनर्निर्माण फंड खाड़ी देशों द्वारा ईरान के लिए 300 अरब डॉलर का फंड दिया जाएगा, बशर्ते ईरान शर्तों को माने।

इस समझौते की वजह से ईरान की करेंसी ‘रियाल’ की कीमत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले बढ़ी है। जानकारों का मानना है कि अगर प्रतिबंध पूरी तरह हट जाते हैं, तो ईरान के कच्चे तेल के निर्यात में भारी बढ़ोतरी होगी।