अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत एक बार फिर संकट में पड़ गई है। रूस के प्रतिनिधि Mikhail Ulyanov ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर बातचीत को आगे बढ़ाना है, तो अमेरिका को अपनी ‘ब्लैकमेलिंग’ वाली रणनीति छोड़नी होगी। इस तनाव की वजह से अब दुनिया भर में तेल की कीमतें भी बढ़ने लगी हैं।

इस्लामाबाद में बातचीत क्यों नहीं हो पाई?

पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का दूसरा दौर होना था। लेकिन यह योजना सफल नहीं हुई क्योंकि ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi अमेरिकी दूतों से मिले बिना ही वहां से वापस लौट गए। ईरान की साफ मांग है कि जब तक अमेरिकी नौसेना उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म नहीं करती, तब तक वह किसी भी तरह की सीधी या अप्रत्यक्ष बातचीत में शामिल नहीं होगा।

अमेरिका की शर्त और रूस का स्टैंड क्या है?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपनी शर्त बहुत कड़ी रखी है। उन्होंने कहा है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए और जब तक यह बात तय नहीं होती, तब तक बातचीत करने का कोई मतलब नहीं है। वहीं रूस के दूत Mikhail Ulyanov ने अमेरिका के इस रवैये की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका केवल डेडलाइन और दबाव डालने की कोशिश कर रहा है, जो कि ईरान के साथ काम नहीं करेगा।

तेल की कीमतों और दुनिया पर क्या असर होगा?

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत रुकने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में खलबली मच गई है। Strait of Hormuz के रास्ते होने वाले शिपमेंट पर पाबंदियां लगी हैं। इस तनाव की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi 27 अप्रैल 2026 को सेंट पीटर्सबर्ग में रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin और विदेश मंत्री Sergey Lavrov से मुलाकात करने वाले थे।