US-Iran Talks Update: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में आई रुकावट, पाकिस्तान की कोशिशों के बाद भी मामला फंसा

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अब पूरी तरह रुक गई है. पाकिस्तान ने दोनों देशों को करीब लाने की बहुत कोशिश की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. हाल ही में ईरान ने समुद्र में जहाजों पर हमला किया है जिससे माहौल और खराब हो गया है. अब दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि क्या दोबारा बातचीत शुरू होगी या तनाव और बढ़ेगा.

बातचीत में क्या दिक्कत आई और अब क्या स्थिति है?

11 और 12 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच 21 घंटे तक लंबी बातचीत चली थी. लेकिन इसमें कोई सहमति नहीं बन पाई. इसके बाद 13 अप्रैल को अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध रोकने के लिए कुछ समय तो दिया लेकिन ईरान ने 20 अप्रैल को साफ़ कह दिया कि वह नए दौर की बातचीत के लिए अपने प्रतिनिधि नहीं भेजेगा.

23 अप्रैल को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने अमेरिका पर गलत इरादे रखने और धमकियां देने का आरोप लगाया. इसी दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो जहाजों पर हमला किया. ईरान की संसद अब इस इलाके पर अपना पूरा कंट्रोल करने की योजना बना रही है.

ईरान और अमेरिका की अपनी-अपनी मांगें क्या हैं?

अमेरिका का कहना है कि ईरान को यह पक्का वादा करना होगा कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ़ किया है कि वे तभी आगे बढ़ेंगे जब ईरान एक ठोस प्रस्ताव पेश करेगा. अमेरिका ने अभी तक ईरान के बंदरगाहों की समुद्री घेराबंदी जारी रखी है.

दूसरी तरफ ईरान का कहना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा और गलत हैं. ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर कालिबाफ ने कहा कि वे धमकियों के साये में बात नहीं करेंगे. ईरान की शर्त है कि जब तक अमेरिका घेराबंदी नहीं हटाता तब तक बातचीत शुरू नहीं होगी.

पाकिस्तान का इस पूरे मामले में क्या रोल है?

पाकिस्तान इस पूरे विवाद में इकलौता मध्यस्थ बना हुआ है. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर की देखरेख में दोनों देशों को साथ लाने की कोशिशें की गईं. पाकिस्तान ने ही शुरू में युद्धविराम कराने में मदद की थी.

23 अप्रैल को पाकिस्तान के Interior Minister मोहसिन नकवी ने अमेरिकी अधिकारी नताली बेकर से मुलाकात की. इस मीटिंग का मकसद आने वाले वीकेंड तक दोबारा बातचीत शुरू कराना था. पाकिस्तान अभी भी इस्लामाबाद में सुरक्षा इंतजाम कर रहा है ताकि अगर बातचीत शुरू हो तो सब कुछ ठीक रहे.