अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में हुई बड़ी बातचीत के बाद अब दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद जगी है। पाकिस्तान और कतर की मदद से हुई इस मीटिंग में कई अहम बातों पर सहमति बनी है। सबसे बड़ी खबर यह है कि अमेरिका ने ईरान के तेल बेचने पर लगी रोक को कुछ समय के लिए हटा लिया है।

बातचीत और नया रोडमैप

21 और 22 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में हुई इस हाई-लेवल मीटिंग के बाद एक रोडमैप तैयार किया गया है। दोनों देशों ने तय किया है कि अगले 60 दिनों के भीतर एक फाइनल समझौता कर लिया जाएगा। इससे पहले पिछले हफ्ते एक शुरुआती समझौता (MoU) हुआ था, जिससे युद्धविराम लागू हुआ और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोला गया ताकि व्यापारिक जहाजों का रास्ता साफ रहे।

तेल प्रतिबंध और परमाणु मुद्दा

अमेरिकी खजाने विभाग ने ऐलान किया है कि ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर लगे प्रतिबंध 21 अगस्त 2026 तक के लिए हटा दिए गए हैं। यह छूट ईरान की इस प्रतिबद्धता से जुड़ी है कि वह होर्मुज जलमार्ग को खुला रखेगा और IAEA के निरीक्षकों को देश में आने देगा। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाए ने साफ किया है कि परमाणु कार्यक्रम पर कोई नया समझौता नहीं हुआ है और निरीक्षकों के आने के लिए संसद और सुरक्षा परिषद की मंजूरी जरूरी होगी।

महत्वपूर्ण विवरण तारीख/समय सीमा
बातचीत खत्म होने की तारीख 22 जून 2026
तेल प्रतिबंधों में छूट की समय सीमा 21 अगस्त 2026
फाइनल समझौते का लक्ष्य 60 दिन
मीटिंग की जगह स्विट्जरलैंड

लेबनान तनाव और चेतावनी

लेबनान में चल रहे तनाव और इजरायल-हिजबुल्ला विवाद को सुलझाने के लिए एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाने पर सहमति बनी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस सेल को समझौते की पहली असली परीक्षा बताया है। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के समर्थक लेबनान में परेशानी खड़ी करेंगे या होर्मुज जलमार्ग को ब्लॉक करेंगे, तो अमेरिका फिर से हमला कर सकता है।

क्षेत्रीय दौरे और अगली तैयारी

इस शांति डील और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio 23 जून को UAE, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, कतर और ओमान के दौरे पर निकले हैं। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने पाकिस्तान का दौरा किया ताकि राजनयिक बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके। स्विट्जरलैंड में अब निचले स्तर की तकनीकी बातचीत जारी रहेगी।