अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को कम करने के लिए स्विट्जरलैंड के Burgenstock में एक बड़ी बैठक हुई। इस बातचीत का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच पुराने विवादों को खत्म करना और युद्ध की स्थिति को रोकना है। इस बैठक में परमाणु कार्यक्रम और तेल प्रतिबंधों जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई है।

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समझौते की शर्तें और बातचीत का तरीका

यह बैठक 17 जून 2026 को साइन हुए एक 14 पॉइंट के समझौते (MoU) के बाद हुई है। इस समझौते का लक्ष्य अमेरिका और इसराइल के ईरान के खिलाफ युद्ध को खत्म करना है। इस MoU के तहत 60 दिनों तक बातचीत करने का फैसला लिया गया था।

ईरान की मुख्य मांगें

ईरान ने बातचीत के पहले दिन अपनी जमा पूंजी (frozen assets) और तेल पर लगे प्रतिबंधों को हटाने पर जोर दिया। ईरान का कहना है कि जब तक इसराइल समझौते का पालन नहीं करेगा, तब तक वह आगे नहीं बढ़ेगा। 20 जून को इसराइल ने लेबनान पर हमले तेज कर दिए थे, जिसे ईरान ने समझौते का उल्लंघन माना है।

बड़े नेताओं और विशेषज्ञों के बयान

  • JD Vance: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने उम्मीद जताई कि परमाणु मुद्दे और लेबनान में युद्धविराम पर तरक्की होगी।
  • ईरानी प्रतिनिधि: ईरान के डेलीगेशन का कहना है कि अमेरिका को यह पक्का करना होगा कि इसराइल समझौते की शर्तों को माने।
  • Professor Mahjoub Zweiri: राजनीतिक विश्लेषक महजूब जुवेरी ने Al Jazeera English को दिए इंटरव्यू में कहा कि दोनों देशों के अपने-अपने हित हैं और इसे समझना जरूरी है।

इनका रहा अहम रोल

इस पूरी बातचीत में Qatar और Pakistan ने मध्यस्थ (Mediators) की भूमिका निभाई है। साथ ही, IAEA के डायरेक्टर जनरल राफेल मारियानो ग्रॉसी की भूमिका पर भी चर्चा हुई। बातचीत में परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और Strait of Hormuz के मैनेजमेंट जैसे मुद्दों को शामिल किया गया है। ईरान अपने तेल उद्योग को किसी भी अंतिम शांति समझौते के लिए एक मुख्य आधार मान रहा है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.