अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खत्म करने के लिए एक बड़ी मीटिंग होने जा रही है। स्विट्जरलैंड के Bürgenstock रिसॉर्ट में दोनों देशों की टीमें रविवार, 21 जून 2026 से तकनीकी बातचीत शुरू करेंगी। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर मदद कर रहे हैं ताकि दोनों देशों के बीच बातचीत सफल हो सके।

इस्लामाबाद समझौता और उसकी शर्तें

यह बातचीत ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) को लागू करने के लिए हो रही है। इस समझौते पर अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इलेक्ट्रॉनिक तरीके से साइन किए थे। इस 14 पॉइंट के समझौते में सैन्य ऑपरेशन्स को रोकने, Strait of Hormuz को फिर से खोलने और अगले 60 दिनों में एक अंतिम डील तक पहुँचने की बात कही गई थी।

इस MoU में अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने, ईरान की जमा संपत्ति वापस करने और आर्थिक विकास कार्यक्रम चलाने जैसी शर्तें भी शामिल हैं।

तनाव और बातचीत में देरी

शुरुआत में यह मीटिंग शुक्रवार, 19 जून को होनी थी, लेकिन इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच जारी लड़ाई की वजह से इसे टाल दिया गया। ईरान के सैन्य कमांड ने शनिवार को ऐलान किया कि उसने Strait of Hormuz को फिर से बंद कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन कर रहा है और इसराइल के हमलों की वजह से वह नाराज है।

अधिकारियों ने क्या कहा

पाकिस्तान ने पुष्टि की है कि रविवार से तकनीकी बातचीत शुरू होगी और वह शांति प्रक्रिया में सहयोग करता रहेगा। वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि मुख्य वार्ताकार Jared Kushner और Steve Witkoff पहले ही स्विट्जरलैंड पहुँच चुके हैं। Vance ने यह भी दावा किया कि उन्हें ऐसी कोई खबर नहीं मिली है कि ईरान ने Strait of Hormuz को बंद किया है और तेल का बहाव जारी है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Bagahei ने कहा कि स्विट्जरलैंड जाने का मकसद अमेरिका से अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने की मांग करना है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि यह अंतरिम समझौता आखिरी नहीं है और अगर नतीजा संतोषजनक नहीं रहा, तो वह फिर से बमबारी शुरू कर सकते हैं।