अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली महत्वपूर्ण बातचीत को फिलहाल रोक दिया गया है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और सैन्य हमलों के कारण अब डिप्लोमैटिक चर्चाओं का भविष्य खतरे में दिख रहा है। ईरान ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखी, तो वह बातचीत को पूरी तरह से बंद कर देगा।

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बैठक टलने की मुख्य वजह

यह बैठक पहले 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के Bürgenstock रिसॉर्ट में होनी तय थी, लेकिन इसे बाद में टाल दिया गया। इसके पीछे कई बड़े कारण थे:

  • लेबनान में तनाव: इसराइल और हिजबुल्ला के बीच लेबनान में सैन्य संघर्ष और हवाई हमले बढ़ गए थे, जिसे ईरान ने बातचीत के खिलाफ माना।
  • JD Vance की यात्रा रद्द: अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति JD Vance ने अपनी स्विट्जरलैंड यात्रा रद्द कर दी थी। व्हाइट हाउस ने इसके लिए लॉजिस्टिक दिक्कतों को वजह बताया था।
  • ट्रंप की चेतावनी: कुछ रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी कि अगर उसने हिजबुल्ला पर लगाम नहीं लगाई, तो वह फिर से हमला करेंगे।

28 जून को बढ़ा सैन्य टकराव

28 जून 2026 को स्थिति और गंभीर हो गई जब दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले किए। अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत को निशाना बनाकर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हाल ही में साइन हुए समझौते (MoU) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

अधिकारियों के बयान

स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि बैठक टल गई है, हालांकि उन्होंने कोई नई तारीख नहीं बताई है। व्हाइट हाउस ने उम्मीद जताई है कि तकनीकी बातचीत जल्द शुरू होगी। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने सख्त लहजे में कहा कि हिंसा का जवाब हिंसा से ही दिया जाएगा।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य के तय रास्तों को अनदेखा करने की कोशिश से तनाव बढ़ेगा। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने भी पहले ही संकेत दिया था कि समझौते के उल्लंघन पर निर्णायक जवाब दिया जाएगा।

क्या था यह समझौता

यह चर्चा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते को लागू करने के लिए होनी थी। इस समझौते का लक्ष्य मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को खत्म करना और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों जैसे संवेदनशील मुद्दों पर 60 दिनों के भीतर एक अंतिम शांति समझौता करना था।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.