अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक दोनों देश बातचीत के सही तरीके यानी फ्रेमवर्क पर सहमत नहीं होते, तब तक कोई नई मीटिंग नहीं होगी। इस बीच Strait of Hormuz को लेकर भी बड़ा फैसला लिया गया है जिससे दुनिया भर के व्यापार पर असर पड़ सकता है।

ईरान ने बातचीत के लिए क्या शर्त रखी है?

ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर Saeed Khatibzadeh ने कहा कि बिना एक साझा फ्रेमवर्क के बातचीत की तारीख तय नहीं हो सकती। उन्होंने जोर दिया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अपने अधिकारों को नहीं छोड़ेगा। उन्होंने अमेरिका के रवैये को भ्रमित करने वाला बताया और राष्ट्रपति Donald Trump के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ईरान अपना यूरेनियम अमेरिका को देगा।

Strait of Hormuz और समुद्री नाकेबंदी का क्या हाल है?

17 अप्रैल को ईरान ने Strait of Hormuz को व्यापारिक जहाजों के लिए खोला था, लेकिन 18 अप्रैल को इसे फिर से बंद कर दिया गया। ईरान ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी है। राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ किया है कि यह नाकेबंदी तब तक नहीं हटेगी जब तक समझौता 100% पूरा नहीं हो जाता।

US-Iran विवाद से जुड़ी मुख्य जानकारियां

तारीख महत्वपूर्ण घटना/बयान
11-12 अप्रैल इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय बातचीत हुई लेकिन कोई समझौता नहीं हुआ
14 अप्रैल UN चीफ ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन पर चेतावनी दी
15 अप्रैल व्हाइट हाउस ने अगली बातचीत के लिए इस्लामाबाद का नाम लिया
17 अप्रैल Donald Trump ने समझौते को लेकर उम्मीद जताई
17 अप्रैल ईरान ने Strait of Hormuz को जहाजों के लिए खोला
18 अप्रैल ईरान ने Strait of Hormuz को फिर से बंद किया
18 अप्रैल Saeed Khatibzadeh ने यूरेनियम ट्रांसफर के दावे को नकारा
Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.