अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक बार फिर तकनीकी बातचीत होने जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर बीच-बचाव कर रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह मीटिंग 30 जून के आसपास हो सकती है, जिससे दुनिया भर की नजरें अब इन देशों पर टिकी हैं।
पाकिस्तान के प्रवक्ता Tahir Andrabi ने बताया कि बातचीत 30 जून को होने की उम्मीद है, लेकिन यह 29 जून या 1 जुलाई को भी हो सकती है। यह चर्चा उन मुलाकातों के बाद हो रही है जो 22 जून को स्विट्जरलैंड के Burgenstock में हुई थीं।
शांति समझौते पर काम
दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने पिछले हफ्ते एक शांति समझौता (MoU) साइन किया था। अब पाकिस्तान और कतर की टीमें अमेरिका और ईरान के साथ मिलकर इसे लागू करने की कोशिश करेंगी। इस समझौते के तहत 60 दिनों के भीतर एक अंतिम शांति समझौता करने का लक्ष्य रखा गया है।
बातचीत के दौरान इन मुख्य मुद्दों पर चर्चा होगी:
- परमाणु मामलों पर बातचीत और उनका समाधान निकालना।
- पाबंदियों (Sanctions) को हटाना और आर्थिक सहयोग बढ़ाना।
- अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए मदद करना।
- लेबनान में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई को रोकने के लिए एक ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाना।
- Hormuz जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला रखना।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच सीधा संपर्क भी शुरू किया गया है ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी को रोका जा सके और संकट को संभाला जा सके। ईरान के तकनीकी प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख Kazem Qaribabadi ने पुष्टि की है कि भविष्य की बातचीत के तरीके और वर्किंग ग्रुप तय कर लिए गए हैं।
हालांकि, इस बीच कुछ विवाद भी सामने आए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने IAEA की परमाणु साइटों पर विज़िट की बात से इनकार किया है, जबकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने इसके बारे में अलग दावा किया था। साथ ही, लेबनान में बढ़ती हिंसा भी इस शांति प्रक्रिया के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 23 जून को इस्लामाबाद का दौरा किया था। उन्होंने साफ कहा कि इन बातचीत की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों पक्ष अपने वादों को कितनी सटीकता से पूरा करते हैं।
