अमेरिका और ईरान के बीच कतर की राजधानी दोहा में चल रही बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच तकनीकी स्तर की चर्चाएं चल रही हैं और नतीजे अच्छे मिल रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

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ताजा जानकारी के मुताबिक, बुधवार 1 जुलाई 2026 को दोहा में तकनीकी बातचीत हुई, जिसकी शुरुआत मंगलवार रात से ही हो गई थी। इन बैठकों में दोनों देशों के एक्सपर्ट ग्रुप शामिल हुए। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बड़े अधिकारियों के बीच कोई सीधी आमने-सामने की मुलाकात नहीं हुई। अमेरिकी दूत Steve Witkoff और Jared Kushner ने कतर के प्रधानमंत्री से मुलाकात कर आगे की तैयारी की, लेकिन वे तकनीकी सत्रों का हिस्सा नहीं थे।

इन मुख्य मुद्दों पर हुई चर्चा

बैठकों के दौरान कुछ अहम बिंदुओं पर बात हुई, जिनमें से कुछ पर सहमति बनी और कुछ पर विवाद रहा:

  • Strait of Hormuz: अमेरिका चाहता है कि ईरान जहाजों से ट्रांजिट फीस लेने की योजना छोड़ दे, लेकिन ईरान अपनी बात पर कायम है। फिलहाल 60 दिनों के लिए फीस न लेने का एक अंतरिम समझौता हुआ है।
  • जमी हुई संपत्ति (Frozen Assets): ईरान के 6 अरब डॉलर की जमी हुई रकम को छोड़ने पर बात हुई। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने कहा कि इस पैसे का इस्तेमाल जरूरी सामान खरीदने के लिए होगा। वहीं, अमेरिका ने साफ किया कि जब तक ईरान शर्तों को पूरा नहीं करता, कोई पैसा नहीं छोड़ा जाएगा।
  • परमाणु कार्यक्रम: राष्ट्रपति Donald Trump ने परमाणु निरस्त्रीकरण में प्रगति की बात कही, लेकिन तकनीकी बैठकों में इस पर सीधी चर्चा नहीं हुई। JD Vance ने कहा कि परमाणु मुद्दे पर बातचीत जल्द ही शुरू होगी।

आगे क्या होगा

दोनों पक्ष इस बातचीत को जारी रखने पर सहमत हुए हैं। अगली बैठक ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार के बाद जल्द से जल्द तय की जाएगी। इसके अलावा, 2 जुलाई 2026 तक एक संचार चैनल (Communication Channel) बनाया जाएगा ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की सूचना तुरंत दी जा सके।

बता दें कि 17 जून 2026 को दोनों देशों ने 14 बिंदुओं वाले ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (MOU) पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें 60 दिनों के युद्धविराम और परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम डील का ढांचा तैयार किया गया था। ईरान के एक्टिंग डिफेंस मिनिस्टर ने यह साफ कर दिया है कि देश के मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम पर कोई बातचीत नहीं होगी, क्योंकि यह उनके लिए एक ‘रेड लाइन’ है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.