अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक बार फिर तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होने वाली है। दोनों देशों ने फिलहाल एक-दूसरे पर हमले रोकने का फैसला किया है ताकि समुद्र में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे। इस कदम का मुख्य मकसद समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाना है ताकि व्यापार में कोई रुकावट न आए।

क्या है समझौते की मुख्य बातें

दोनों पक्षों के बीच 17 जून को 14 पॉइंट्स वाला एक समझौता (MoU) साइन हुआ था। इस समझौते का लक्ष्य लड़ाई को रोकना और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना है। इस डील के तहत अगले 60 दिनों के भीतर एक अंतिम समझौते पर पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है।

इन तकनीकी बातचीत में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी, जैसे:

  • ईरान के परमाणु कार्यक्रम की स्थिति।
  • ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नाकेबंदी हटाना।
  • ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देना।
  • ईरान के यूरेनियम स्टॉक का भविष्य।
  • लेबनान के लिए एक आपसी तालमेल तंत्र बनाना।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल्स पर लगे प्रतिबंधों को 60 दिनों के लिए हटाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान अमेरिकी शर्तों को कितना मानता है।

बातचीत को लेकर अलग-अलग दावे

इस बातचीत को लेकर अमेरिका और ईरान के बयानों में अंतर दिख रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वैन्स ने कहा कि तकनीकी समूह की बैठक स्विट्जरलैंड में 29 या 30 जून के आसपास हो सकती है और बातचीत सही दिशा में है।

दूसरी तरफ, ईरान के एक अधिकारी ने 28 जून को बताया कि ईरान ने तय मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने समझौते की शर्तें पूरी नहीं की हैं और उसके फ्रीज किए गए पैसों तक उसे पहुँच नहीं मिली है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी हमलों की वजह से सभी डिप्लोमैटिक बातचीत पूरी तरह रुक सकती है।

समुद्री सुरक्षा और सख्त चेतावनी

होर्मुज जलडमरूमध्य एक बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है। अमेरिका और खाड़ी देश चाहते हैं कि यहाँ अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से जहाजों को आने-जाने की आज़ादी मिले। वहीं, ईरान ने इस रास्ते पर अपना नियंत्रण जताया है और जहाजों को अपने बताए रूट पर चलने की हिदायत दी है।

इस मुद्दे पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका को सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी, तो ईरान का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि इस रास्ते पर ईरान किसी भी तरह का टोल या बीमा शुल्क नहीं वसूल सकता।

तनाव कम करने के लिए अमेरिका ने ओमान के साथ मिलकर एक अस्थायी समुद्री रास्ता भी खोला है ताकि जहाजों की भीड़ कम हो सके और उन्हें सुरक्षित रास्ता मिल सके।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.