ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट अल जजीरा ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध में जीत नहीं सकता। इस बीच ईरान ने अपनी सेना को पूरी तरह अलर्ट कर दिया है और सऊदी अरब ने भी अमेरिका के सैन्य अभियानों में साथ देने से साफ मना कर दिया है।

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत का क्या स्टेटस है?

ईरान ने अमेरिका के ताजा प्रस्ताव पर अपना जवाब पाकिस्तान के जरिए भेजा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि उनका पूरा ध्यान सिर्फ क्षेत्र में युद्ध को रोकने और सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर है। हालांकि, ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला सैयद मुजतबा होसेनी खामेनेई ने सशस्त्र बलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी तैयारी बढ़ाएं ताकि किसी भी हमले का मजबूती से जवाब दिया जा सके।

सऊदी अरब और यूरोपीय देशों की क्या भूमिका है?

सऊदी अरब के एक अधिकारी ने अमेरिका को स्पष्ट कर दिया है कि वह हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए किए जाने वाले किसी भी अमेरिकी हमले में शामिल नहीं होगा। सऊदी ने अपनी जमीन या सैन्य अड्डों का इस्तेमाल करने की अनुमति भी नहीं दी है। दूसरी ओर, ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम गरीबबादी ने फ्रांस और ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि वे इस रणनीतिक समुद्री रास्ते पर अपने युद्धपोत न भेजें।

अमेरिका की चेतावनी और ताज़ा सैन्य घटनाक्रम क्या हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि बातचीत अच्छी चल रही है और डील संभव है, लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका दबाव बना सकता है या बमबारी कर सकता है। इसी बीच ईरान ने खबर दी है कि उनकी सेना ने देश के दक्षिण-पश्चिम इलाके में घुसपैठ करने वाले एक जासूसी ड्रोन को मार गिराया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव पर क्या जवाब दिया है?

ईरान ने पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए जवाब भेजा है, जिसमें उन्होंने केवल क्षेत्रीय संघर्ष को खत्म करने और सुरक्षा सुधारने पर बात करने की इच्छा जताई है।

सऊदी अरब ने अमेरिका को क्या साफ किया है?

सऊदी अरब ने कहा है कि वह अमेरिका के उन हमलों में हिस्सा नहीं लेगा जिनका मकसद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को खोलना है, और न ही अपने बेस का इस्तेमाल करने देगा।