अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की नींद उड़ा दी है. Strait of Hormuz में चल रही सैन्य हलचल की वजह से एशियाई शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई है और तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है. इस टकराव का सीधा असर आम लोगों की जेब और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है.
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Strait of Hormuz में क्या हुआ और अमेरिका का ‘Project Freedom’ क्या है?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने फंसे हुए जहाजों को रास्ता दिखाने के लिए ‘Project Freedom’ की शुरुआत की है. अमेरिकी सेना ने बताया कि उन्होंने नागरिक जहाजों को निशाना बनाने वाली ईरान की 6 छोटी नावों को डुबो दिया. इस बीच, UAE के Fujairah के उत्तर में एक टैंकर पर अज्ञात मिसाइल हमले की खबर आई, जिसके बाद UAE सरकार ने इमरजेंसी मिसाइल अलर्ट जारी किया. अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी है, जबकि ईरान का दावा है कि उसने अमेरिकी नौसेना के जहाज पर हमला किया, जिसे अमेरिका ने नकार दिया है.
बाजारों और अर्थव्यवस्था पर इस लड़ाई का क्या असर पड़ा?
इस तनाव की वजह से निवेशकों का भरोसा डगमगा गया है और Wall Street के बाद एशियाई बाजारों में भी गिरावट आई है. UN महासचिव António Guterres ने चेतावनी दी है कि अगर यह संकट बढ़ा तो दुनिया में गरीबी और भूख बढ़ सकती है और वैश्विक मंदी आ सकती है. महंगाई बढ़ने के कारण Reserve Bank of Australia ने अपनी ब्याज दर बढ़ाकर 4.35% कर दी है. तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट और सामानों के दाम बढ़ने का खतरा है.
| संस्था/बाजार | अपडेट/असर |
|---|---|
| crude oil (तेल) | 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर |
| India Sensex | 0.7% की गिरावट |
| Hong Kong Hang Seng | 1.3% की गिरावट |
| Reserve Bank of Australia | ब्याज दर बढ़कर 4.35% हुई |
| ईरानी नावें | 6 नावें अमेरिकी सेना ने डुबोईं |
| US Flagged Ships | 2 जहाज सफलतापूर्वक निकले |
| UAE Status | मिसाइल अलर्ट जारी किया गया |
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या यह तनाव तेल की कीमतों को और बढ़ाएगा?
हाँ, Strait of Hormuz दुनिया का एक मुख्य रास्ता है. यहाँ तनाव होने से तेल की सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे भाव 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकते हैं.
आम निवेशकों के लिए यह स्थिति कितनी चिंताजनक है?
अमेरिकी और ईरानी टकराव की वजह से एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई है, जिससे निवेशकों के पोर्टफोलियो पर असर पड़ा है.