अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच हुआ युद्धविराम समझौता टूट गया है और अब ईरान ने बड़े हमले की तैयारी शुरू कर दी है। ईरान के संसद अध्यक्ष ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका ने धोखा दिया तो वे चुप नहीं बैठेंगे।
ईरान के संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf ने शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को कहा कि उनका देश “फुल-स्केल डिफेंस” यानी पूरी तैयारी के साथ रक्षा के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ टकराव में ईरान हार नहीं मानेगा। साथ ही उन्होंने मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे अमेरिका और इसराइल के खिलाफ एक साथ आएं।
क्या था समझौता और क्यों टूटा
बता दें कि 17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच “Islamabad Memorandum” साइन हुआ था। इस समझौते का मकसद 2026 के ईरान युद्ध को खत्म करना और Strait of Hormuz को दोबारा खोलना था। इसके तहत परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय किया गया था।
लेकिन 8 से 10 जुलाई 2026 के बीच राष्ट्रपति Trump ने ऐलान कर दिया कि यह ceasefire यानी युद्धविराम अब खत्म हो गया है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने Strait of Hormuz में व्यापारिक जहाजों पर हमले किए हैं, जिसे उन्होंने आतंकवाद बताया है।
हमले और जवाबी कार्रवाई
तनाव तब और बढ़ गया जब 8 जुलाई को अमेरिका ने ईरान के तटीय इलाकों में 90 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी बेस की तरफ मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिन्हें बाद में इंटरसेप्ट कर लिया गया।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने 9 जुलाई को इन हमलों की कड़ी निंदा की और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर और समझौते का उल्लंघन बताया। दूसरी तरफ, अमेरिकी एजेंसी OFAC ने 7 जुलाई को ईरान के साथ लगभग सभी व्यापारिक रिश्तों पर फिर से पाबंदी लगा दी है।
क्या अभी भी बातचीत की उम्मीद है
इतनी तनातनी के बावजूद, राष्ट्रपति Trump ने 10 जुलाई को कहा कि अमेरिका शांति समझौते के लिए ईरान की बातचीत की मांग पर सहमत है और तकनीकी चर्चा अभी भी चल रही है। पाकिस्तान और कतर जैसे देशों ने भी बीच-बचाव की कोशिश की है और तनाव कम करने के लिए ईरानी अधिकारियों से मुलाकात की है।
