अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब Gulf देशों की नींद उड़ा दी है। अमेरिका ने ईरान के करीब 90 ठिकानों पर बड़े हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने कुवैत, कतर और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस तनाव के बाद इन देशों में सुरक्षा अलर्ट जारी कर दिया गया है और लोग काफी डरे हुए हैं।
US Central Command (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि उन्होंने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज और नेवल इंफ्रास्ट्रक्चर सहित लगभग 90 जगहों पर हमले किए। CENTCOM ने कहा कि इसका मकसद Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखना और ईरान की क्षमता को कम करना था। दूसरी तरफ ईरान के हेल्थ मिनिस्ट्री ने बताया कि दो दिनों तक चले अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की जान गई और 78 लोग घायल हुए।
जवाब में ईरान की Revolutionary Guard ने बहरीन, कुवैत और कतर में अमेरिकी सैन्य सुविधाओं पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए। ईरान की मिलिट्री ने बताया कि उन्होंने ‘वन-वे अटैक ड्रोन’ का इस्तेमाल किया। उनके निशाने पर कुवैत में पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर सिस्टम, कतर में अर्ली वार्निंग सिस्टम और बहरीन में फ्यूल टैंक थे। कुवैत की मिलिट्री ने जानकारी दी कि उन्होंने 2 बैलिस्टिक मिसाइल और 13 ड्रोन को हवा में ही मार गिराया।
हमलों के बाद कतर के Interior Ministry ने इमरजेंसी सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया और निवासियों को सुरक्षित जगहों पर रहने की सलाह दी। बहरीन के Interior Ministry ने बताया कि वहां एयर रेड सायरन बजाए गए और नागरिकों से शेल्टर में जाने को कहा गया। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहम अल-थानी ने अमेरिका और ईरान दोनों से अपील की है कि वे बातचीत का रास्ता चुनें और पुराने समझौतों को लागू करें। एक्सपर्ट्स का कहना है कि Gulf देश इस समय शांति चाहते हैं और किसी भी तरह की जंग में नहीं फंसना चाहते।
इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ ceasefire यानी युद्धविराम खत्म होने का ऐलान कर दिया। वहीं ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर कालिबाफ ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उन पर हमला होगा, तो वह उसका जवाब जरूर देंगे।
