अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने 9 जुलाई 2026 को ईरान पर सैन्य हमले की पूरी तैयारी कर ली थी, लेकिन आखिरी समय पर वॉशिंगटन ने युद्ध के बजाय बातचीत का रास्ता चुना।

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दोनों देशों के बीच तनाव के बीच अमेरिका ने MOU (समझौते) पर अपनी प्रतिबद्धता जताई है। इस समझौते में 60 दिनों का युद्धविराम (ceasefire) और Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की व्यवस्था शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि अगर ईरान समझौते की शर्तों को मानता है, तो तकनीकी बातचीत जारी रहेगी।

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका पर बड़े हमले करने का आरोप लगाया है। ईरान का दावा है कि 8 और 9 जुलाई को अमेरिका ने उसके पांच प्रांतों में सैन्य हमले किए, जिसमें रेलवे पुल जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया। ईरान ने इसे एक गंभीर युद्ध अपराध बताया है।

ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों में 14 लोगों की जान गई और 78 लोग घायल हुए। इस मामले को लेकर ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) और UN महासचिव को पत्र लिखकर अमेरिका पर UN चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

ईरान ने यह भी दावा किया है कि उसने Bahrain, Kuwait और Qatar में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और रणनीतिक केंद्रों पर हमले किए हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने चेतावनी दी है कि Strait of Hormuz में शिपिंग रूट तय करने में किसी भी तरह की अमेरिकी दखलअंदाजी का कड़ा जवाब दिया जाएगा।

इस बीच, क्षेत्रीय साझेदार Qatar ने दोनों देशों से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और मौजूदा MOU को लागू करें ताकि इस टकराव को कम किया जा सके।

Sushma Kumari

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