अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। 17 जून 2026 को शांति के लिए हुए समझौते, जिसे ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ के नाम से जाना जाता था, उसे अब ईरान ने मानने से इनकार कर दिया है। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है।
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क्या है समझौते के टूटने की वजह
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने 19 जुलाई 2026 को यह पुष्टि की कि उनका देश अब 14-सूत्रीय MoU का पालन नहीं करेगा। ईरान का कहना है कि अमेरिका लगातार सैन्य हमले कर रहा है, जिससे समझौते का उल्लंघन हुआ है। इसके साथ ही ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर को बेकार बताया है।
लगातार चल रही सैन्य कार्रवाई
युद्ध शुरू हुए अब 141 दिन बीत चुके हैं। हाल ही में 17 जुलाई को ईरान के हमले में जॉर्डन में 2 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी, जिसके बाद अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर लगातार 7 दिनों से जवाबी हमले तेज कर दिए हैं। ईरान ने कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भी ड्रोन हमले का दावा किया है। यह समझौता पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र की मध्यस्थता में हुआ था, लेकिन अब दोनों देशों के बीच फिर से हालात तनावपूर्ण हो गए हैं।
