अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी करने का आदेश दिया है, जिससे पूरी दुनिया में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है और वैश्विक व्यापार पर बुरा असर पड़ने की आशंका है।

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर क्या पाबंदी लगाई है?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 13 अप्रैल, 2026 से ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी शुरू कर दी है। यह नियम उन सभी जहाजों पर लागू होगा जो ईरान के बंदरगाहों में आ-जा रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर कोई भी ईरानी जहाज इस घेराबंदी के पास आया तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। हालांकि, गैर-ईरानी जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने की अनुमति होगी, बशर्ते उनका संबंध ईरान से न हो।

दुनिया पर क्या असर हुआ और अन्य देशों का क्या कहना है?

इस नाकेबंदी की वजह से वैश्विक व्यापार और तेल की सप्लाई पर बड़ा असर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 7% बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई है। विभिन्न देशों की प्रतिक्रियाएं नीचे दी गई तालिका में हैं:

देश/संस्था बयान और स्थिति
चीन ईरान के साथ व्यापार जारी रखेगा और नाकेबंदी का विरोध किया है।
ब्रिटेन इस नाकेबंदी का हिस्सा नहीं बनेगा और कूटनीति से समाधान चाहेगा।
ईरान इस कार्रवाई को समुद्री डकैती बताया है और चेतावनी दी है।
पाकिस्तान यहाँ हुई शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई।

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की क्या स्थिति है?

नाकेबंदी लागू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आई है। पहले जहाँ औसतन 135 जहाज यहाँ से गुजरते थे, अब यह संख्या घटकर लगभग 40 प्रतिदिन रह गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि नाकेबंदी शुरू होने के बाद से एक भी जहाज वहां से नहीं गुजरा है।