ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रजा तलाई-निक ने शनिवार, 23 मई 2026 को अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि इस टकराव से बचने का एकमात्र रास्ता ईरानी लोगों की मांगों को पूरा करना है। ईरान का साफ कहना है कि अगर अमेरिका ने उसकी मांगें स्वीकार नहीं कीं, तो वाशिंगटन और उसके सहयोगियों को इस क्षेत्र में और अधिक नुकसान उठाना पड़ेगा। इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं और तनाव को कम करने के लिए कई स्तरों पर बातचीत चल रही है।
ईरान ने अमेरिका और इसराइल को दी क्या चेतावनी?
ईरानी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रजा तलाई-निक ने सरकारी मीडिया तस्नीम न्यूज एजेंसी के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इसराइल के पास इस जंग से सुरक्षित निकलने का केवल एक ही रास्ता है कि वे ईरान की कानूनी मांगों को स्वीकार करें। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आगे के नुकसान से बचने के लिए ईरान के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। इसके साथ ही ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने भी कहा कि ईरान कोई नाजायज रियायत नहीं मांग रहा है, बल्कि वह अपने फ्रीज किए गए पैसों को जारी करने, प्रतिबंधों को पूरी तरह हटाने और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को समाप्त करने की मांग कर रहा है।
अमेरिकी प्रशासन और होर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने शुक्रवार, 22 मई 2026 को जानकारी दी कि ईरान के साथ बातचीत में मामूली प्रगति हुई है, लेकिन उन्होंने किसी भी जल्दबाजी वाली उम्मीद से इनकार किया। उन्होंने साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान द्वारा टोल टैक्स सिस्टम लगाने की कोशिशों को अमेरिका स्वीकार नहीं करेगा। रुबियो ने चेतावनी दी कि अगर ईरान इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह सुचारू नहीं रखता है, तो अमेरिका अपने Plan B पर काम शुरू कर देगा। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी ईरान पर नए सैन्य हमलों पर विचार कर रहे हैं, हालांकि खाड़ी देशों की अपील पर उन्होंने पूर्व में तय एक सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया है।
तनाव को शांत करने के लिए हो रहे हैं कौन से राजनयिक प्रयास?
इस गंभीर संकट को टालने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्यस्थता की कोशिशें तेज हो गई हैं। पाकिस्तान इस मामले में अहम मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और आंतरिक मंत्री सैयद मोहसिन नकवी ने तेहरान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची से सुरक्षा स्थिति पर चर्चा की है। इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी ईरानी विदेश मंत्री से फोन पर बात कर शांति स्थापित करने की अपील की है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान द्वारा तैयार किया गया एक अंतिम समझौता मसौदा दोनों देशों की मंजूरी का इंतजार कर रहा है, जिससे शांति की थोड़ी उम्मीद बची हुई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान ने अमेरिका के सामने क्या प्रमुख मांगें रखी हैं?
ईरान ने अमेरिका के सामने प्रतिबंधों को तुरंत हटाने, अपनी फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करने, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करने और अपने कानूनी अधिकारों को स्वीकार करने की मांग रखी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच क्या विवाद है?
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टोलिंग सिस्टम शुरू करने का प्रयास किया है, जिसे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है और इसके खिलाफ ‘प्लान बी’ लागू करने की चेतावनी दी है।
इस विवाद में पाकिस्तान और अन्य देशों की क्या भूमिका है?
पाकिस्तान इस विवाद को सुलझाने के लिए मुख्य मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है और उसने एक शांति समझौते का अंतिम मसौदा भी तैयार किया है। इसके अलावा कतर और संयुक्त राष्ट्र भी दोनों देशों के संपर्क में हैं।
