होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि वे ईरान को अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों का दुरुपयोग नहीं करने देंगे। 29 जुलाई 2026 को अमेरिका ने फिर दोहराया कि यह समुद्री रास्ता किसी एक देश की जागीर नहीं है और यहाँ व्यापारिक जहाजों पर किसी भी तरह की रोक या हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने 22 जुलाई को ईरान के उस दावे को पूरी तरह नकार दिया, जिसमें ईरान खुद को व्यापारिक जहाजों पर हमला करने का अधिकार मान रहा था। तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC Navy) ने 29 जुलाई को होरमुज में व्यापारिक जहाजों पर हमले का दावा किया। इसके जवाब में अमेरिका और Saudi Arabia ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर हमले किए।
ईरान की नई योजना और अमेरिका की सख्ती
ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने 28 जुलाई को ओमान के सामने होरमुज जलमार्ग को नियंत्रित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे उन्होंने अपने परमाणु हथियार जैसा महत्वपूर्ण बताया है। ईरान ने उन देशों या कंपनियों के जहाजों को भी इस रास्ते से गुजरने पर रोक लगाने की धमकी दी है, जो पूर्व राष्ट्रपति Trump की उस योजना का समर्थन करते हैं जिसमें जप्त की गई ईरानी संपत्ति का उपयोग नुकसान की भरपाई के लिए किया जाना है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि CENTCOM ने 14 जुलाई से ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी कर रखी है और नियमों को न मानने वाले जहाजों को रोका जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी 20 जुलाई से सऊदी अरब के बंदरगाहों पर नाकेबंदी की घोषणा कर दी है और सऊदी के तेल टैंकरों पर हमले करने के दावे किए हैं। ओमान ने होरमुज प्रबंधन का जो प्रस्ताव दिया था, उसे 29 जुलाई को अमेरिका ने सिरे से खारिज कर दिया है।
