अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। US Navy ने दावा किया है कि उन्होंने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में ईरान की 6 छोटी नावों को डुबो दिया है। हालांकि ईरान ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है। इस बीच UAE में भी ड्रोन हमले हुए हैं जिससे पूरे इलाके में डर का माहौल है।

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अमेरिका का दावा और Project Freedom क्या है?

U.S. Central Command के कमांडर Admiral Brad Cooper ने 4 मई 2026 को बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की 6 छोटी नावों को नष्ट कर दिया। अमेरिका का कहना है कि ये नावें स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में नागरिक जहाजों को निशाना बना रही थीं। इसके अलावा अमेरिका ने यह भी बताया कि ईरान ने कई क्रूज मिसाइल और ड्रोन दागे थे जिन्हें नाकाम कर दिया गया।

जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने Project Freedom की शुरुआत की। इस मिशन का मकसद कमर्शियल जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिखाना है। अमेरिकी नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर्स खाड़ी में तैनात हैं और अब तक दो अमेरिकी जहाजों ने सुरक्षित रास्ता पार किया है।

ईरान का पलटवार और UAE की स्थिति

ईरानी सरकारी मीडिया जैसे IRIB, Fars और Tasnim ने अमेरिका के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान के आर्मी कमांडर Amir Hatami ने कहा कि जब अमेरिकी जहाज स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ के पास आए तो उन्हें जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ा। ईरान ने यह भी साफ किया कि उसका UAE पर हमला करने का कोई इरादा नहीं है।

दूसरी तरफ, UAE ने जानकारी दी कि उन्होंने ईरान की तरफ से आए 3 ड्रोन को हवा में ही रोक लिया। इस तनाव के कारण एक दक्षिण कोरियाई कार्गो जहाज को भी नुकसान पहुंचा है। बता दें कि 13 अप्रैल से अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर रखी है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका और ईरान के बीच विवाद की मुख्य वजह क्या है?

अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान की 6 नावों को डुबोया जो नागरिक जहाजों पर हमला कर रही थीं, जबकि ईरान ने इन दावों को झूठ बताया है।

Project Freedom का क्या मकसद है?

यह अमेरिकी सेना का एक अभियान है जिसका उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना और उनकी रक्षा करना है।