अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नौसेना के दखल के बाद ईरान ने कड़ी चेतावनी दी है, जबकि अमेरिका ने साफ़ कर दिया है कि वह अपने मिशन में किसी भी बाधा को बर्दाश्त नहीं करेगा। इस पूरे विवाद के बीच अब समुद्री रास्तों पर युद्ध जैसी स्थिति बन गई है।
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Project Freedom क्या है और अमेरिका ने इसे क्यों शुरू किया?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 मई 2026 को ‘Project Freedom’ नाम की एक पहल का ऐलान किया। इस मिशन का मकसद हॉर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे विदेशी जहाजों और उनके चालक दल की मदद करना है, क्योंकि कई जहाज रसद की कमी से जूझ रहे थे। अमेरिका ने इसे एक मानवीय कदम बताया है।
- इस मिशन के लिए अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर और 100 से ज़्यादा विमान तैनात किए हैं।
- इसमें लगभग 15,000 सैनिक और कई ड्रोन प्लेटफॉर्म शामिल हैं।
- अमेरिकी अधिकारियों ने Axios को बताया कि अमेरिकी जहाज जहाजों के बिल्कुल साथ नहीं रहेंगे, बल्कि उनके आस-पास तैनात रहेंगे और किसी भी हमले का जवाब देंगे।
- ट्रंप ने चेतावनी दी कि इस मानवीय प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट को बलपूर्वक जवाब दिया जाएगा।
ईरान का क्या कहना है और क्या वाकई हमला हुआ?
ईरान ने अमेरिकी नौसेना के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। ईरान के सशस्त्र बलों की एकीकृत कमान ने चेतावनी दी कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा उनके हाथ में है और बिना अनुमति प्रवेश करने वाले किसी भी विदेशी सैन्य बल पर हमला किया जाएगा।
- मेजर जनरल अली अब्दोलाही ने साफ़ कहा कि हमलावर अमेरिकी सेना को निशाना बनाया जाएगा।
- ईरान की फ़ारस न्यूज़ एजेंसी ने दावा किया कि एक अमेरिकी फ्रिगेट पर दो मिसाइलें गिरीं, लेकिन अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को पूरी तरह नकार दिया।
- ईरान के नेशनल सिक्योरिटी कमेटी के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने कहा कि अमेरिका का यह दखल युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा।
- वहीं, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि 13 अप्रैल से जारी नौसैनिक नाकाबंदी की वजह से ईरान की तेल कमाई रुक गई है और उनके तेल कुएँ जल्द बंद हो सकते हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Project Freedom का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे विदेशी जहाजों और उनके क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकालना है, जिन्हें रसद की कमी का सामना करना पड़ रहा था।
क्या ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही है?
हाँ, शांति प्रस्तावों पर चर्चा जारी है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाइ ने कहा है कि अमेरिका को अपनी मांगों में कमी लानी होगी।