अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में ईरान के एक कमर्शियल जहाज ‘Toska’ पर हमला कर उसे अपने कब्जे में ले लिया है। ईरान ने इस कार्रवाई को ‘सशस्त्र समुद्री डकैती’ करार दिया है और चेतावनी दी है कि वह जल्द ही इसका करारा जवाब देगा।
अमेरिका ने कैसे पकड़ा ईरानी जहाज और क्या था कारण?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि US Navy के जहाज USS Spruance ने Toska जहाज को रोकने की कोशिश की। जब जहाज नहीं रुका, तो उसके इंजन रूम में छेद कर दिया गया ताकि वह आगे न बढ़ सके। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, जहाज को रोकने के लिए कई बार चेतावनी दी गई थी लेकिन वह नहीं रुका। अमेरिकी मरीन ने हेलीकॉप्टर के जरिए जहाज पर चढ़कर क्रू मेंबर्स को अपनी हिरासत में ले लिया। अमेरिका ने अब ईरान पर वैश्विक समुद्री नाकाबंदी लगा दी है, जिसके तहत अब तक 34 जहाजों का रास्ता बदला गया है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और चेतावनी
ईरान की IRGC और खातम अल-अनबिया हेडक्वार्टर के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल इब्राहिम ज़ोल्फघारी ने कहा कि अमेरिकी सेना की इस हरकत का जवाब जल्द दिया जाएगा। ईरान ने इस घटना को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है। जवाबी कार्रवाई के तौर पर ईरान की नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो कंटेनर जहाजों को जब्त किया है और एक अन्य जहाज को निशाना बनाया है। ईरान के विदेश मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र मिशन ने मांग की है कि जहाज और उसके क्रू को बिना शर्त तुरंत रिहा किया जाए।
क्या बातचीत से सुलझेगा यह मामला?
तनाव के बीच अमेरिका ने बातचीत की कोशिश शुरू की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को पाकिस्तान भेजा है ताकि वहां ईरान के विदेश मंत्री के साथ नए सिरे से बात की जा सके। हालांकि, ईरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ दूसरी दौर की शांति वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका की शर्तें अव्यावहारिक हैं और उसकी नौसेना की नाकाबंदी युद्धविराम के नियमों के खिलाफ है।