अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी सेना आज रात ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर बड़ा हमला करने की तैयारी में है। दोनों देशों के बीच शुरू हुए इस नए विवाद के बाद खाड़ी देशों में भी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है क्योंकि ईरान ने जवाबी कार्रवाई में कुवैत और बहरीन जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है।
अमेरिका ने क्यों लिया ईरान पर हमले का फैसला
इस ताज़ा सैन्य तनाव की शुरुआत 8 जून 2026 को हुई जब होर्मुज जलडमरू मध्य के पास एक ईरानी ड्रोन ने अमेरिकी सेना के एएच-64 अपाचे हेलिकॉप्टर को मार गिराया था। इसके बाद अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने आत्मरक्षा में ईरान के हवाई रक्षा प्रणालियों, रडार साइटों और ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों पर हवाई हमले किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान ने समझौता करने में बहुत लंबा समय ले लिया है और अब उसे इसकी कीमत चुकानी होगी। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी साफ किया कि यदि बातचीत के लिए बमों की जरूरत होगी तो वे बमों से ही बात करेंगे।
ईरान का पलटवार और कुवैत-बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर असर
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने बहरीन में तैनात अमेरिकी पांचवें बेड़े पर ड्रोन हमला करने का दावा किया है। वहीं जॉर्डन की हवाई सुरक्षा प्रणाली ने पांच मिसाइलों को बीच में ही मार गिराया। इस तनाव से खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां के सुरक्षा माहौल पर सीधा असर पड़ रहा है। ईरान के खातम अल-अंबिया केंद्रीय मुख्यालय ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने फिर से हमले किए तो वे क्षेत्र में पहले से तय किए गए अमेरिकी ठिकानों पर और भी गंभीर हमले करेंगे।
नागरिक सुविधाओं को नुकसान और नए प्रतिबंध
इस टकराव के बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर बड़ा आरोप लगाया है। ईरान का कहना है कि अमेरिकी हमलों में सीरिक इलाके के दो पानी के जलाशयों को निशाना बनाया गया जिससे 20,000 लोग पीने के पानी से वंचित हो गए हैं। ईरान ने इसे एक युद्ध अपराध करार दिया है। दूसरी तरफ अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरान के सैन्य तंत्र और हथियार खरीद नेटवर्क से जुड़े नौ लोगों और संगठनों पर नए कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं और कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह रुकी हुई है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका और ईरान के बीच इस ताज़ा विवाद की मुख्य वजह क्या है?
यह विवाद तब बढ़ा जब 8 जून 2026 को होर्मुज जलडमरू मध्य के पास ईरान ने एक अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर को मार गिराया, जिसके जवाब में अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले शुरू कर दिए।
ईरान के जवाबी हमलों का खाड़ी देशों पर क्या असर पड़ा है?
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे इस पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ गया है।
क्या इस तनाव के बीच कोई कूटनीतिक बातचीत चल रही है?
ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार बार-बार होने वाले हमलों और संघर्ष विराम के उल्लंघनों के कारण फिलहाल अमेरिका के साथ सभी कूटनीतिक प्रयास और बातचीत पूरी तरह से रुक गई है।
