पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ रहा है और अमेरिका तथा ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार नौवें दिन भी जारी है। अमेरिकी केंद्रीय कमान CENTCOM ने सोमवार 20 जुलाई 2026 को पुष्टि की कि मिडिल ईस्ट में तैनात 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक हाई अलर्ट पर हैं। ये सैनिक अपने युद्धक हथियारों के साथ किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
लगातार हो रहे हवाई हमले
अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल लॉन्च पैड्स और संचार नेटवर्क को निशाना बनाना शुरू किया है। इन ऑपरेशनों का मुख्य उद्देश्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा बनाए रखना है। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी भी लागू कर दी है ताकि व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों को रोका जा सके। इस बीच, इराक के उत्तरी हिस्से में एक अमेरिकी जवान की मौत होने और जॉर्डन स्थित अमेरिकी बेस पर हुए नुकसान की खबरें भी सामने आई हैं।
ईरान ने जताया कड़ा विरोध
ईरान की संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने सोशल मीडिया के जरिए अमेरिकी सैन्य तैनाती पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका एक तरफ शांति की बात करता है और दूसरी तरफ हथियारों को तैनात कर रहा है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उन्होंने कुवैत, जॉर्डन और सीरिया के Al-Tanf इलाके में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की है। ईरान ने चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका का आक्रमण जारी रहेगा, तब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य से पेट्रोकेमिकल का परिवहन सुरक्षित नहीं होगा।
अंतरराष्ट्रीय जांच और राजनयिक रुख
ईरान के Darkhovin स्थित परमाणु संयंत्र पर हुए हमले की जांच अब IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) कर रही है। दूसरी तरफ अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कहा कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन वे ईरान के साथ वास्तविक कूटनीति के लिए भी तैयार हैं। क्षेत्र में बढ़ती इस गहमागहमी के चलते आने वाले दिनों में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया जा रहा है।
