अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जून में हुए युद्धविराम को खत्म करने का ऐलान कर दिया है। इसकी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर हुए हमले बताए जा रहे हैं। दोनों देशों के बीच शांति समझौते को लेकर अब बड़े विवाद शुरू हो गए हैं।
🚨: Iran-US War: सऊदी और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की फोन पर बात, ईरान और अमेरिका की जंग से बढ़ी चिंता।
पूर्व ब्रिटिश राजदूत Nicholas Hopton के मुताबिक, युद्ध के बाद के समझौते (MoU) को लेकर दोनों देशों में मतभेद हैं। ईरान अपनी ताकत दिखाने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल कर रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जहाजों पर हमले और उसके बाद अमेरिकी जवाबी हमलों के कारण 60 दिनों का युद्धविराम अब खत्म हो चुका है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान की बातचीत की मांग को मान गया है और बातचीत जारी रहेगी।
वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने ट्रंप की बात को गलत बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने समझौते के नियम 9 का उल्लंघन किया है, जो ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़ा है। इस बीच, मामले को सुलझाने के लिए ईरान का एक दल आज ओमान (Oman) गया है। अमेरिका ने ईरान से मांग की है कि वह आज ही जहाजों पर हमला रोकने का वादा करे, वरना उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
खबरों के मुताबिक, ईरान ने ट्रंप के सलाहकारों को बताया है कि ये हमले कुछ कट्टरपंथियों ने किए थे ताकि बातचीत खराब हो सके। इस पूरे मामले में पाकिस्तान भी बीच-बचाव की कोशिश कर रहा है और उसने तनाव बढ़ने पर चिंता जताई है।
हाल ही में हुए अमेरिकी हवाई हमलों में 17 लोग मारे गए और 115 घायल हुए। डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर उन पर किसी भी तरह के हमले की कोशिश हुई, तो वह ईरान को पूरी तरह तबाह कर देंगे। उन्होंने कहा कि इसके लिए 1000 मिसाइलें तैयार हैं। दूसरी तरफ, ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने अपने पिता Ayatollah Ali Khamenei की मौत का बदला लेने की कसम खाई है।
विशेषज्ञों के बीच इस बात पर बहस चल रही है कि क्या अब समझौता पूरी तरह खत्म हो गया है या यह बातचीत का जरिया बना रहेगा। कुछ लोगों का मानना है कि ईरान के कट्टरपंथी गुट चाहते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बना रहे, ताकि बातचीत में उनकी पकड़ मजबूत रहे।
