ईरान के दक्षिणी इलाकों में 14 जुलाई 2026 को अमेरिकी सेना ने बड़े हमले किए हैं। ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी IRNA के मुताबिक रात 11 बजे होरमोजगन प्रांत में कई मिसाइलें गिरीं। यह लगातार तीसरी रात है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के आदेश पर CENTCOM ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की है। इस हमले का मुख्य मकसद समुद्री रास्तों और होर्मुज की खाड़ी में सुरक्षा बनाए रखना बताया गया है।
हमले में हुआ भारी नुकसान
अमेरिकी सेना की कार्रवाई में खुज़ेस्तान, बुशहर और होरमोजगन प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। Qeshm Island पर शाम 7 बजे हुए हमले के साथ ही अलग-अलग जगहों पर कुल 3 लोगों की मौत की खबर है। हमले के कारण किश आइलैंड का पावर प्लांट, मछली पकड़ने वाली बंदरगाहें और कई नागरिक सुविधाएं बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। बंदर अब्बास, जस्क, कोनरक और चाबहार जैसे तटीय शहरों में भी भारी तबाही हुई है।
ईरान का पलटवार और नाटो का समर्थन
ईरान के IRGC ने इस कार्रवाई का जवाब देते हुए बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलें दागीं। तनाव तब और बढ़ गया जब Donald Trump ने ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नौसैनिक नाकाबंदी लागू कर दी। NATO प्रमुख Mark Rutte ने अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन करते हुए इसे सीजफायर समझौते के उल्लंघन के बाद की जरूरी प्रतिक्रिया बताया है। गल्फ में चल रही इस उठापटक के कारण क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
