अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव लगातार ग्यारहवें दिन भी जारी रहा, जहाँ 22 जुलाई 2026 को अमेरिकी बलों ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर फिर से हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित करना और ईरान की सैन्य क्षमताओं को कम करना है। इस संघर्ष में अब तक लगभग 37.5 अरब डॉलर का खर्च हो चुका है।
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क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर और हमले
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत, जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाकर ड्रोन भेजे हैं। साथ ही, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक टैंकर और दो अन्य जहाजों पर हमला करने की जिम्मेदारी ली है। जॉर्डन की सेना ने 22 जुलाई को ईरान की ओर से आए चार मिसाइल और चार ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया, जिससे कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। कुवैत की सेना ने भी इसी तरह के ड्रोन हमलों का सामना किया है।
बढ़ता मानवीय और कूटनीतिक संकट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि होर्मुज में हर एक हमले के बदले ईरान के किसी पुल या बिजली संयंत्र को निशाना बनाया जाएगा। इस संघर्ष में अब तक 18 अमेरिकी सैनिक अपनी जान गवां चुके हैं, जिनमें 17 जुलाई को जॉर्डन में मारे गए तीन जवान शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने नागरिक बुनियादी ढांचे पर हो रहे इन हमलों को अस्वीकार्य बताया है। फिलहाल, पाकिस्तान में चल रही शांति वार्ता विफल रही है और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के आसार अभी कम हैं।
