अमेरिका और ईरान की तनातनी से दुनिया भर में महंगा हुआ तेल, कच्चे तेल की कीमतों में आया बड़ा उछाल.

दुनियाभर में ईंधन की सप्लाई को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और इसका सीधा असर तेल की कीमतों पर देखने को मिल रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया। ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर $91.14 प्रति बैरल पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड $85.04 प्रति बैरल के हिसाब से ट्रेड कर रहा है। बाजार के जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बिगड़ते हालातों की वजह से आने वाले दिनों में आम आदमी की जेब पर असर पड़ सकता है और रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं।
अग्रीमेंट खत्म होने और नाकाबंदी से बिगड़े हालात
अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों का एक समझौता यानी एमओयू हुआ था, जिसकी मियाद सोमवार, 17 अगस्त को खत्म हो गई। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल के टैंकरों की आवाजाही को सुरक्षित रखना और किसी बड़े विवाद को टालना था। लेकिन बिना किसी समझौते या विस्तार के यह अवधि समाप्त हो गई। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस समझौते को आगे बढ़ाने से साफ मना कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वे ईरानी बंदरगाहों पर चल रही अपनी नौसेना की नाकाबंदी के जरिए पूरी स्थिति पर मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं और उन्हें इस तरह की पाबंदियों से कोई गुरेज नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कड़े शब्दों में यह भी कहा कि यदि ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के अमेरिकी प्रयासों में किसी भी तरह की बाधा डाली, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
ईरान का आक्रामक रुख और सैन्य तेवर
अमेरिका के इस सख्त रवैये के जवाब में ईरान ने भी अपनी रणनीति पूरी तरह बदल दी है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रॉयटर्स को जानकारी दी कि उनका देश अब पूरी तरह से 'आक्रामक' सैन्य रुख अपनाने जा रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघाई ने स्पष्ट किया कि ईरान ने इस समझौते को बढ़ाने के लिए होने वाली किसी भी तरह की बातचीत को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका यह भी कहना था कि अमेरिका ने शुरुआत से ही इस समझौते के नियमों और शर्तों का उल्लंघन किया है। ईरान का यह भी दावा है कि मूल समझौता युद्ध विराम के बजाय 'युद्ध के अंत' से जुड़ा हुआ था और वे चाहते हैं कि अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को तुरंत हटाया जाए, ताकि सामान्य स्थिति बहाल हो सके।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही ठप
समुद्री यातायात पर नजर रखने वाली कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर बहुत बुरा असर पड़ा है। इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर यातायात लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया है। पिछले हफ्ते के आखिरी दिनों में जहां यहां से 31 जहाज गुजरे थे, वहीं 15 अगस्त को केवल पांच जहाज ही इस रास्ते से निकल पाए और 16 अगस्त को तो एक भी जहाज की आवाजाही दर्ज नहीं की गई। केसीएम के मुख्य बाजार विश्लेषक टिम वाटरर ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच खराब होते रिश्तों और इस अहम रास्ते को दोबारा सुरक्षित रूप से खोलने का कोई साफ रास्ता न होने की वजह से बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
लाल सागर में हमला और आगे की स्थिति
इस तनाव के बीच सप्लाई की चिंताओं को और बढ़ाने वाली एक और घटना सामने आई है, जिसमें यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सउदी अरब के एक सैन्य जहाज और उसके चार सुरक्षा जहाजों पर हमला कर दिया। इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का वैश्विक तेल सप्लाई और मांग पर क्या असर पड़ रहा है, यह देखने के लिए बाजार के निवेशक और व्यापारी अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी एपीआई की साप्ताहिक क्रूड ऑयल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जिसे मंगलवार को ही जारी किया जाना है। इस पूरी स्थिति पर दुनिया भर के उन तमाम लोगों की नजर टिकी है जो नौकरी या कारोबार के सिलसिले में खाड़ी देशों से जुड़े हैं, क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों का असर अंततः परिवहन और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।