अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई अब बहुत बढ़ गई है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल ले जाने वाले जहाजों का आना-जाना लगभग बंद हो गया है। दोनों देशों के बीच शांति के लिए हुआ समझौता अब पूरी तरह टूट चुका है और हालात खतरनाक मोड़ पर पहुँच गए हैं।

17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने एक समझौता (MoU) किया था। इसका मकसद आपसी दुश्मनी खत्म करना, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना और रास्ते को सुरक्षित करना था। लेकिन ‘आर्टिकल 5’ को लेकर दोनों देशों में विवाद हो गया। अमेरिका का कहना था कि व्यापारिक जहाजों को बिना किसी रुकावट के आने-जाने देना होगा, जबकि ईरान ने ट्रैफिक मैनेजमेंट और फीस वसूलने के अपने अधिकार पर जोर दिया।

8 और 9 जुलाई 2026 के बीच हालात बहुत खराब हो गए। अमेरिका ने आरोप लगाया कि ईरान ने 6 और 7 जुलाई को तीन व्यापारिक जहाजों पर हमला किया। इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के 170 से ज्यादा सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल साइट, नौसेना ठिकाने और लॉजिस्टिक्स सेंटर शामिल थे। अमेरिकी हमलों में तेहरान से मशहद जाने वाली रेलवे लाइन और चाबहार के बंदरगाहों को भी भारी नुकसान पहुँचा है।

ईरान ने भी पलटवार करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। कुवैत में इस हमले से एक व्यक्ति की मौत हुई और काफी सामान नष्ट हो गया। ईरान ने जॉर्डन पर भी बैलिस्टिक मिसाइल दागने का दावा किया है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अमेरिकी हमलों की वजह से उनके देश में 14 लोगों की जान गई और 78 लोग घायल हुए हैं।

तनाव इतना बढ़ गया कि अमेरिका ने 8 जुलाई को ईरानी तेल निर्यात पर दी गई अस्थायी छूट को वापस ले लिया। अब होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों ने डर और महंगे बीमा खर्चों की वजह से अपने ट्रांसपोंडर बंद कर दिए हैं, जिससे वहाँ जहाजों की आवाजाही लगभग थम गई है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 जुलाई को ऐलान किया कि जून का समझौता अब खत्म हो चुका है। उन्होंने ईरानी अधिकारियों की कड़ी आलोचना की और और सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने वॉशिंगटन पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ ने कहा कि रास्ता तभी खुलेगा जब ईरान की शर्तें मानी जाएंगी। संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगुएज़ ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है और दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान न हो।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.