ईरान और अमेरिका के बीच चल रही तनातनी अब और भी खतरनाक मोड़ पर आ गई है। 19 जुलाई 2026 को अमेरिका ने ईरान के चौथे सबसे बड़े शहर तबरीज़ (Tabriz) के पास हवाई हमले किए। यह हमला लगातार सातवीं रात को हुआ, जिसे अमेरिका की तरफ से अपने सैनिकों की मौत का बदला बताया जा रहा है। इस सैन्य कार्रवाई ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है।
कुवैत और जॉर्डन के ठिकानों पर हमला
अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान की सेना ने तेजी से कार्रवाई की। ईरान ने दावा किया कि उसने कुवैत के दो अमेरिकी ठिकानों और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों पर ड्रोन से हमला किया। कुवैत में कैंप उडैरी (Camp Udairi) के हथियार डिपो और अली अल सलेम एयर बेस (Ali Al Salem Air Base) के रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया। इस घटना के बाद कुवैत और बहरीन ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय कर दिया है ताकि किसी भी ड्रोन या मिसाइल हमले को रोका जा सके।
क्षेत्र में फैला डर और तबाही
ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हमलों में हवाई अड्डे, रेलवे स्टेशन और दो पुलों जैसी नागरिक सुविधाओं को नुकसान पहुँचा है। बता दें कि मार्च से जून के बीच भी अमेरिका ने तबरीज़ में सैन्य ठिकानों और पेट्रोकेमिकल सुविधाओं को निशाना बनाया था। ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने पहले ही चेतावनी दी थी कि अगर हमले नहीं रुके तो अमेरिका को इसका कड़ा सबक सिखाया जाएगा। जून 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ शांति समझौता भी अब टूट चुका है, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के बीच भी चिंता का माहौल है।
