अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और युद्ध रोकने के लिए स्विट्ज़रलैंड के Burgenstock में हाई-लेवल बातचीत शुरू हो गई है। दोनों देशों के बड़े नेता रविवार, 21 जून 2026 को यहाँ पहुंचे। इस बातचीत का मकसद दुनिया में शांति लाना और आपसी झगड़ों को खत्म करना है।
यह पूरी प्रक्रिया उस समझौते (MoU) के बाद शुरू हुई है, जिस पर 18 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने दस्तखत किए थे। इस समझौते के तहत दोनों देशों को 60 दिनों के भीतर सभी मुद्दों को सुलझाकर अंतिम फैसला लेना होगा।
कौन-कौन ले रहा है हिस्सा
- अमेरिका की टीम: इस टीम का नेतृत्व उपराष्ट्रपति JD Vance कर रहे हैं। उनके साथ विशेष दूत Steve Witkoff और राष्ट्रपति के सलाहकार Jared Kushner भी शामिल हैं।
- ईरान की टीम: ईरान की ओर से संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araghchi बातचीत का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके साथ सुरक्षा, सेंट्रल बैंक और तेल विभाग के बड़े अधिकारी भी आए हैं।
- बीच-बचाव करने वाले: पाकिस्तान और कतर इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल Syed Asim Munir भी रविवार को स्विट्ज़रलैंड पहुंच गए हैं।
स्विट्ज़रलैंड के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि उन्होंने इस बातचीत के लिए एक सुरक्षित और गोपनीय जगह मुहैया कराई है। वहीं, परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा के लिए IAEA के डायरेक्टर जनरल Rafael Grossi भी इन तकनीकी बातचीत में शामिल होंगे।
लेबनान विवाद और देरी
शुरुआत में यह बातचीत 19 जून को होनी थी, लेकिन लेबनान में लड़ाई बढ़ने के कारण इसे टालना पड़ा। ईरान ने लेबनान में युद्धविराम की गारंटी मांगी थी। अब पहली ही दिन के कार्यक्रम में इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच चल रहे संघर्ष को सुलझाने के लिए एक इमरजेंसी सेशन रखा गया है।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर विवाद
बातचीत के बीच तनाव तब बढ़ गया जब शनिवार को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान किया। ईरान का कहना था कि अमेरिका समझौते का पालन नहीं कर रहा है। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को गलत बताया और कहा कि यह रास्ता खुला है और यहाँ से 55 व्यापारिक जहाज गुज़रे हैं।
इस बीच, राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अगर 60 दिनों के भीतर ईरान के साथ कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका इस जलमार्ग पर टोल टैक्स वसूलना शुरू कर देगा।
