अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ विवाद को सुलझाने के लिए कूटनीति का रास्ता अपनाने का फैसला किया है. व्हाइट हाउस ने आधिकारिक तौर पर बताया कि ट्रंप बातचीत के जरिए मुद्दों को हल करना चाहते हैं. इस बीच कतर के दोहा में दोनों देशों के बीच तकनीकी बातचीत भी फिर से शुरू हो गई है.

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राष्ट्रपति Trump ने इस बात पर खुशी जताई है कि अमेरिका और ईरान के रिश्ते अब बेहतर हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों को रोकने की कोशिशें सही दिशा में जा रही हैं और कतर में हुई बैठकें काफी अच्छी रहीं. व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है कि राष्ट्रपति फिलहाल सैन्य टकराव के बजाय बातचीत को प्राथमिकता दे रहे हैं.

परमाणु बातचीत के लिए पहले 18 अगस्त की समय सीमा तय की गई थी, लेकिन अब ट्रंप इसे आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं ताकि बातचीत से कोई ठोस नतीजा निकल सके. हालांकि, अमेरिका ने अपनी रणनीति यह रखी है कि वह बातचीत जारी रखेगा लेकिन अगर ईरान ने समझौते (MoU) का उल्लंघन किया, तो अमेरिका सीमित जवाबी कार्रवाई कर सकता है.

प्रमुख अधिकारियों का बयान

  • अमेरिका के इसराइल राजदूत Mike Huckabee ने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
  • उपराष्ट्रपति JD Vance ने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने का अपना मुख्य मिशन पूरा कर लिया है.

जून 2026 में एक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे, जिसके तहत ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने और अमेरिका ने समुद्र के रास्ते (Strait of Hormuz) से जहाजों की नाकेबंदी हटाने पर सहमति जताई थी. इस समझौते के तहत 60 दिनों का अंतरिम युद्धविराम भी तय किया गया था.

फिलहाल बातचीत में एक मुख्य विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर सर्विस चार्ज लगाने को लेकर है. ईरान ने यह प्रस्ताव रखा है, लेकिन अमेरिका ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है. इस पूरी प्रक्रिया में कतर और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं.